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किसी पे फ़िदा कभी होना नहीं

मुकम्बल फ़साना है दिल का यही,
तुम किसी पे फ़िदा कभी होना नहीं|
तुम्हारे दिल मैं है मोहब्बत अगर,
तो अपने कदम पीछे करना नहीं,
किनारे पे तुम जो रपट भी गये ,
तो ये जमाना तुम्हे छोड़ेगा नही|
चाहते हो जो तुम ज़माने से ,
बचना ये मेरे प्यारे दोस्त,
भूल से भी तुम प्यार करना नहीं,
रस्ते हैं कठिन सच के सारे मगर,
झूठ का साथ कभी देना नहीं|
तेरे दिल में हैं अगर लाख गम ,
चेहरे पे सिकन कभी लाना नहीं,
मुस्कुराते तू रहना सदा मेरे दोस्त,
मुझसे कभी गम छुपाना नहीं \
दोस्ती जिन्दगी का ऐसा साथ है ,
जो सदा साथ दे ना छूटे कभी,
दोस्त तुझसे कहूँगी मैं तो यही ,
मुकम्बल फ़साना है दिल का यही,
तुम किसी पे फ़िदा कभी होना नहीं |
- दीप्ति शर्मा


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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !