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ये जिंदगी का झरना



ये जिंदगी का झरना
ना कोई किनारा,
ना कोई है मंजिल,
बहता चला गया,
ये  जिंदगी का झरना|

कई चोटे खाए,
कई दर्द झेले,
उम्मीदों के भंवर में,
बहता  चला गया ,
ये जिंदगी का झरना |

ना उम्मीदें  टूटी,
ना होसलें ही हरे ,
इस ज़िन्दगी ने हरदम,
नए खेल है खेले,
मुश्किल हैं राहें सारी,
छूटे कई  सहारे ,
यूँ मुश्किलों के मारे,
ख्वाबो के सहारे,
बहता चला गया ,
ये जिंदगी का झरना|
- दीप्ति

Comments

मुझे ये कविता बहुत अच्छी लगी! लिखते रहिये.
Rajesh Kumari said…
bahut pyari kavita.god bless you.

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मैं चीख रही ,
मेरा लहू धधक रहा
कहीं सड़क लाल तो
कहीं बदरंग हो रही
पर ना बिजली चमकी
ना बरसात हुई
ना आँधी आयी
आयी तो उदासी
बस नसीब में मेरे
सुन ख़ुदा !
तू बहरा हो गया क्या ?
-दीप्ति शर्मा
नीले आसमां को देखती
निगाहों की टकटकी,
आँखों से रिसते पानी को
सुबह की ओस से
रात का तारा बना देती  है ।
@दीप्ति शर्मा