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मेरी परछाई




वो कैसी आह की परछाई हैं
मैंने खुद को लहरों मे डुबो, 
तूफानों से ये कश्ती बचायी है |
जिस पर अब तक सम्भल
मेरी जिंदगी चली आई है |
हैं राहें कश्मकस भरी ,
अजनबी लोगो में रह किस 
तरह बात समझ पाई है |
मुददत से अकेली हूँ मैं ,
तमन्नाये जीने की मैने तो 
ये बाजी खुद ही गंवाई है |
वो गैरों के भरोसये शौक में
आह में डूब ढलती हुई ,
फिरती वो मेरी ही परछाई है |
- दीप्ति शर्मा 

Comments

UNBEATABLE said…
वाह वाह .... बहुत खूब .... शब्दों को सुन्दरता से पिरोया है ... बहुत भावनात्मक रचना .... दिल की गहराईओं से लिखी गयी ... सुन्दर
haath badhaao perchhaain ko le lo apne saath , badh jao aage ... akelapan kaisa
satyam said…
आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (12.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
सदा said…
सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।
बहुत बढ़िया भावाभिव्यक्ति
दीप्ति जी
बहुत सुन्दर रचना लिखी .
एक अच्छी अभिव्यक्ति .......क्या खूब लिखा है!
आप बहुत अच्छा लिखती हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!
sagebob said…
सरल शब्दों में सरस अभिव्यक्ति.
शुभ कामनाएं
madansharma said…
अत्यंत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति! लाजवाब!
सारी रचनाये आपकी बहुत ही अच्छी है|
संग फिरे है वह परछाँई,
लम्बी फैल गयी परछाई।
बहुत सुंदर.... भावपूर्ण प्रस्तुति....
मुददत से अकेली हूँ मैं ,
तमन्नाये जीने की मैने तो
ये बाजी खुद ही गंवाई है |

waaaahhhhhhhh
Dr Varsha Singh said…
सुन्दर और भावपूर्ण कविता । बधाई।
एक-एक शब्द भावपूर्ण ..... बहुत सुन्दर...
शब्द सुमन-सा सज गया रचना भाव-प्रधान।
परछाईं से हो गयी दीप्ती की पहचान।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
बहुत सुंदर भाव ..और आत्मविश्वास से भरे हुए ...शुक्रिया
सरल शब्दों में सरस अभिव्यक्ति|
Kunwar Kusumesh said…
भावपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति..........वाह वाह ,क्या बात है.
Bhushan said…
आह में डूब ढलती हुई
फिरती वो मेरी ही परछाई है
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति.
वाह दीप्ती जी बेहतरीन भावाभिव्यक्ति ने मान प्रसन्न कर दिया |
बधाई एवं आभार !!
amit-nivedita said…
very nice configuration of thoughts..
बढ़िया...बधाई...
Minakshi Pant said…
बहुत से एहसासों को उजागर करती प्यारी सी रचना !
बहुत भावनात्मक रचना .... दिल की गहराईओं से लिखी गयी ... सुन्दर
दीप्ति,

मेरी टिप्पणी कहाँ गयी?
अच्‍छी और भावपूर्ण रचना। बधाई हो आपको।
प्रेम को लेकर मेरी एक पोस्‍ट पर नजर डालें और अपने विचार वहां रखें तो अच्‍छा लगेगा।
imran ji
yaha se kuch comment apne aap delete ho gye
mujhe nhi pata
mai kosis kar rahi hu ki
mujhe pata chal jaye
दीप्ति जी
बहुत सुन्दर रचना लिखी!


आपको हेप्पी वेलन्टाईन डे की हार्दिक शुभकामनायें
...स्वीकार करें
शुभकामनायें आपको !!
Udan Tashtari said…
अच्छी अभिव्यक्ति .
खुद में गुम अपना साया.
Manpreet Kaur said…
bout he aache shabad likhe hai aapne...
Keep Visit my Blog Plz... :D
Lyrics Mantra
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Ravi Rajbhar said…
wah-2
dil bag-2 hogya yahan akar.
aapke shabdo me jo wajan hai uska koi jabab nahi.

aap hamare blogg par bhi padhare.

Thanx
OM KASHYAP said…
बहुत सुन्दर रचना...........
अच्छी अभिव्यक्ति ..........
ANAL KUMAR said…
दीप्ति जी, आपकी कविताएँ पढ़ता रहा हूँ और यह देख कर चकित होता रहा हूँ कि कम उम्र में भी आपने अपनी कविताओं में जीवन की सहजता को किस समग्रता में गूंथा है | मुझे लगता है कि यह कविताओं में आपकी आगध-आस्था ही है जिनमें जीवन की विविधतापूर्ण स्थितियां संवेदनात्मक रूपमें अभिव्यक्त होती हैं |
Wah, sundar bawon ko aapne shabdon men badi hi khubsurati se piroya hai !
दीप्ति जी
सस्नेहाभिवादन !

खुद को लहरों मे डुबो,
तूफानों से ये कश्ती बचाई है

व्यष्टि के उत्सर्ग द्वारा समष्टि की रक्षा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत हुआ है आपकी रचना में … आभार !

नेट की समस्या के कारण
दो दिन विलंब से ही …
प्रणय दिवस की मंगलकामनाएं ! :)
♥ प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार !

बसंत ॠतु की भी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
"खुद को लहरों मे डुबो,
तूफानों से ये कश्ती बचाई है"

शुभ आशीष
Akshita (Pakhi) said…
यह तो बहुत सुन्दर लिखा आपने....बधाई.


______________________________
'पाखी की दुनिया' : इण्डिया के पहले 'सी-प्लेन' से पाखी की यात्रा !
बहुत सुन्दर भावनात्मक रचना !
बेहतर!!!लगे रहिए।
Rajey Sha said…
और कि‍सी को साथ लेने से पहले ये जरूर पढ़ना

http://rajey.blogspot.com/ पर
Mithilesh dubey said…
अत्यंत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति!
Anonymous said…
BAHUT BADHIYA .....
JAGDISH BALI said…
Superb post. Following u.visit my blog.
sumeet "satya" said…
badhiya........khubsurat abhivyakti

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा