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मैं



दिल में उठे हर इक 
सवाल की भाषा हूँ |

सिमटे हुए अहसासों को 
जगाने की अभिलाषा हूँ |

गहरा है हर जज्बात 
जज्बातों से पलते 
खवाब की परिभाषा हूँ |

अकेली हूँ जहाँ में पर 
जगती हुई  मैं आशा हूँ |

- दीप्ति शर्मा 

Comments

UNBEATABLE said…
Apnii swayam ki bahut khoobsurat paribhasha di hai tumne .... Shabdon ko achhe se Piroya hai ... Lajawab .. :)
Kunwar Kusumesh said…
ख़ुद को परिभाषित किया तुमने बड़ी अच्छी तरह,
दीप्ती ! ये पल जिया तुमने बड़ी अच्छी तरह.
My good wishes are always with you.
sandhya said…
Very nice.......
Ek to khoobsoorat se sawal aur unke laajawab se uttar sab kuchh hai in panktiyon me........ beautiful
दीप्ती जी , बहुत ही प्यारे एहसास है... सुंदर अभिव्यक्ति...
.
नये दसक का नया भारत (भाग- १) : कैसे दूर हो बेरोजगारी ?
Wakai bahut badhiya likha hai aapne..

sundar shabd chayan aur sundar bhav...is rachana ke liye badhai..
बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में
Beautiful as always.
It is pleasure reading your poems.
"गहरा है हर जज्बात,
जज्बातों से पलते
ख़्वाब की परिभाषा हूँ !"
सुन्दर ,गहरी अभिव्यक्ति लिए हुई पंक्तियों के लिए बधाई !
ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ
अकेली हूं जहां में पर, जगती हुई मैं आशा हूं।
बहुत सुन्दर रचना, मुबारकबाद।
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|
muskan said…
bahut sunder rachna.
'उदय' said…
... kyaa kahane ... behatreen rachanaa/gajal !!
इस आशा को जगाए रखियेगा,शुभकामनाएँ.
ashish said…
आशा की इस दीप्ती को जलाये रखना . सुन्दर रचना .
ana said…
bahut sundar likhti hai aap .......meri shubhakamnaaye
यह आशावादिता बनी रहे।
खूबसूरत अहसास।
बहुत सुंदर - शुभ आशीष
अरे बहुत बढिया लि्खा है दीप्ती।
मेल से भेज दिया करो लिंक

आभार
deepti ji bahut achchhe... aap apni kitab kyu nhi likhti.... aapke andar bahut prtibha hai....hame sahyod ki avashkta ho to mujhe aadesh karen....
thanx for visiting My son's Blog MADHAV.

this is my first visit on ur blog. it is worthy blog. ur musings are really fantsatic
amar jeet said…
दीप्ती जी आशावादी कविता
वैसे आपके पेपर कैसे बने बताइयेगा
mark rai said…
thanks a lot to visit my blog....
aapka blog thoda alag ehsaas liye hue hai..bahut achcha laga yahan par aakar...
वाह वाह
बहुत
सुन्दर रचना
'अदा' said…
bahut sunder rachna..
वाह बहुत खूब !
बहुत खूब ...
हार्दिक शुभकामनायें !
बहुत खूब ...

आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ..
स्वयं को परिभाषित करती आपकी इस विलक्षण रचना के लिए ढेरों बधाई...

नीरज
pragya said…
अंतिम पंक्ति बहुत ख़ूबसूरत है दीप्ति....
shalini kaushik said…
bahut khoob..dipti antim line me jagti hue ke sthan par yadi jagti hui ek aasha hoon likho to mere vichar me aur achchha rahega.vaise swayam ka vishleshan bahut sundar kiya hai...mere blog par aane ke liye aabhar.aage bhi aayen aur mera utsah badhayen.....
deepak saini said…
कम शब्दो मे बहुत कुछ कह दिया
बधाई
Vilas Pandit said…
Very Nice Dipti ji.
ehsas said…
antim do line ne dil me jagah bana li. aabhar.
दीप्ति जी, आपके ब्‍लॉग पर पहली बार आया हूं। आपने जिस प्रकार खुले मन से अपने भावों को कविता में पिरोया है, वह मन को छू जाने वाला है। हार्दिक बधाई।

---------
पति को वश में करने का उपाय।
मासिक धर्म और उससे जुड़ी अवधारणाएं।
Shah Nawaz said…
बेहद खूबसूरत जज्बातों को समेटे हुए लिखा है आपने...
mahendra verma said…
एक उत्तम कविता के लिए बधाई।
Sunil Kumar said…
खूबसूरत अहसास
दीप्ति जी,

छोटी पर बढ़िया पोस्ट ....बहुत अच्छी लगी.....आखिरी पंक्ति में 'हुए' की जगह 'हुई' होना चाहिए था....बाकि बहुत सुन्दर लगी ये पोस्ट....शुभकामनायें|
UNBEATABLE ji, Kunwar Kusumesh ji, sandhya ji, उपेन्द्र ' उपेन ' ji, विनोद कुमार पांडेय ji, संजय भास्कर ji, ज्ञानचंद मर्मज्ञ ji, ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι ji, Harsh ji, Patali-The-Village ,
muskan ji, 'उदय ji, अभिषेक मिश्र ji ,ashish ji, ana ji,
प्रवीण पाण्डेय ji, मनोज कुमार ji, राकेश कौशिक ji, SATYAM ,ललित शर्मा ji, अन्तर्द्वन्द ji,mrityunjay kumar rai ji,amar jeet ji, mark rai ji, अरूण साथी ji,'अदा'ji, Kishore Choudhary ji, सतीश सक्सेना ji, नीरज गोस्वामी ji,
pragya ji, shalini kaushik ji, deepak saini ji, Vilas Pandit ji,ehsas ji, ZEAL ji,अनुपमा पाठक ji,
ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ji,Shah Nawaz ji,
mahendra verma ji, mridula pradhan ji,Sunil Kumar ji,इमरान अंसारी ji

आप सभी ने मेरे प्रयास को सराहा
उसके लिए बहुत आभार
इमरान अंसारी ji, shalini kaushik ji ,
मैने हुए की जगह हुई कर लिया है
वहा हुई ही था पर गलती से हुए लिख गया
आपका साभार
sada said…
बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों का संगम इस रचना में ।
बहुत खूबसूरत और सकारात्मक सोच लिए अच्छी नज़्म
Minakshi Pant said…
अकेली हो तुम फिर भी अकेली नहीं
इतने प्यारे हैं जज्बात तो फिर ...........
किसी और कि जरूरत नहीं ...........

बहुत खुबसूरत एहसास !
माणिक said…
itane saare comment baap re...badhaai. waise rachanaa achchee hai...
M VERMA said…
आशाओं से परिपूर्ण कभी अकेला नहीं हो सकता
सुन्दर रचना
सुन्दर कविता है दीप्ति जी.
amit-nivedita said…
सुंदर सरल काव्यात्मक परिचय ।बधाई ।
positivity in your poetry, keep it up.
akele hokar bhi jagane ki aasha bahut achchhi hai....
अकेली हूँ जहाँ में पर
जगती हुई मैं आशा हूँ
क्या आत्म विश्वास है...कहीं पर अस्तित्व बोध का एहसास हो जाता है ..बहुत बहुत शुक्रिया
hamesha ek jaagti aasha bano...bahut badhiyaa
Bhushan said…
सकारात्मक सोच से सजी रचना. बहुत अच्छी लगी.
P S Bhakuni said…
मकर संक्राति ,तिल संक्रांत ,ओणम,घुगुतिया , बिहू ,लोहड़ी ,पोंगल एवं पतंग पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं........
किस बात का गुनाहगार हूँ मैं....संजय भास्कर
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
धन्यवाद
"गहरा है हर जज्बात,
जज्बातों से पलते
ख़्वाब की परिभाषा हूँ !"

बहुत सुन्दर रचना
आभार
जय श्री कृष्ण...आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!
Pradeep said…
दीप्ती जी ...
बहुत सुन्दर एहसास ....
आशा कभी अकेली नहीं होती ....उस के साथ कई ख्वाब चलतें है ..आप भी नहीं हैं ...मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार .
bahut hi sunderrrr

rachna pasand aaiiiiiiiiiii
Gopal Mishra said…
bahut khoob ...achchi rachna hai...
"पलाश" said…
बेहद भाव पूर्ण रचना ।
दीप्ती जी जो चित्र आपने इस रचना के लिये चुना , इसे एक बार हम भी अपनी रचना पर लाये थे , शायद ये हम लोगो के मिलते खयालात की निशानी है ।
सकारात्मक और आशावादी ख़यालात लिए पंक्तियाँ ......
boletobindas said…
तुमने पुकारा औऱ हम चले आए......
आकर पता चला कि पहले भी बिन बुलाए चले आए थे....
टिप्पणी के निशां नहीं छोड़ के चले थे....
इत्ती तारीफ लोगो ने कर दी है कि कुछ कहने को बचा है क्या।

इन सभी 67 लोगो की तारीफ मेरी समझ कर कबूल कर लो। आशाओं से भरी कविताएं हैं......
Vijai Mathur said…
आपको ,सभी परिवारीजनों को मकर संक्रांति की शुभकामनायें.
mukti said…
बहुत प्यारी रचना है.
shikha varshney said…
जैसा कि सबने कह ही दिया है ..
सुन्दर आशावादी रचना. :)
is jagti hui aashaa ko is insaan kaa salaam.....!!!acchha likhaa hai...!!
बहुत ही प्यारे एहसास है... सुंदर अभिव्यक्ति|
itni kum age me itni pratibha ascharyajanak. bahut khoob.
Mr Bisht said…
Yes You are. Nice couplets.
mark rai said…
बहुत ही प्रभावशाली रचना
उत्कृष्ट लेखन का नमूना
लेखन के आकाश में आपकी एक अनोखी पहचान है ..
shiva said…
सुन्दर ,गहरी अभिव्यक्ति लिए हुई पंक्तियों के लिए बधाई !
ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया !
Shivkumar
आपका ब्लॉग देखा, आपकी रचनात्कता प्रभावशाली है. आप मेरे ब्लॉग काव्यम पर आई और अपनी अमूल्य टिप्पणी दी, कृपया मेरा आभार स्वीकार करें
kya baat hae wakai bahut khu...
ek baar jara hamare blog par akar hamari rachana ke baare me kuchh salah dijiy.....
dhanybaad.....
sagebob said…
आशा को संजोए रखिए और लिखते रहिये.शुभ कामनाएं
सुन्दर शब्दों की बेहतरीन शैली ।
भावाव्यक्ति का अनूठा अन्दाज ।
बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति ।
सुन्दर बहुत khoob
ऐसी sakaratmak रचना पढवाने के लिए शुक्रिया
- अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"

amanagarwalmarwari.blogspot.com

marwarikavya.blogspot.com
गहरी अभिव्यक्ति लिए सुन्दर रचना
आपको बधाई

आभार
aap sabhi ko bahut bahut aabhar
kripya yuhi margdarshan karte rahe

dhanyvad
दीप्ति,

बधाई आखिर तुमने ठीक कर लिया....पर यह टेम्पलेट सही नहीं लगा मुझे अंको में तकलीफ होती है कोई साधारण सा इस्तेमाल करो जो आँखों को अच्छा लगे....
आपकी रचना को पढ़ कर सुखद अनुभूति हुई।
कल नेताजी सुभाषचंद बोस की जयन्ती थी
उन्हें याद कर युवा शक्ति को प्रणाम करता हूँ।
आज हम चरित्र-संकट के दौर से गुजर
रहे हैं। कोई ऐसा जीवन्त नायक युवा-पीढ़ी
के सामने नहीं है जिसके चरित्र का वे
अनुकरण कर सकें?
============================
मुन्नियाँ देश की लक्ष्मीबाई बने,
डांस करके नशीला न बदनाम हों।
मुन्ना भाई करें ’बोस’ का अनुगमन-
देश-हित में प्रभावी ये पैगाम हों॥
===========================
सद्भावी - डॉ० डंडा लखनवी
बेहद भाव पूर्ण रचना .........दीप्ती जी
इमरान अंसारी ji ,
डॉ० डंडा लखनवी ji,
संजय भास्कर ji
aap sabhi ka bahut aabhar
kripaya
yuhi
margdarshan karte rahen

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा