"गहरा है हर जज्बात, जज्बातों से पलते ख़्वाब की परिभाषा हूँ !" सुन्दर ,गहरी अभिव्यक्ति लिए हुई पंक्तियों के लिए बधाई ! ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया ! -ज्ञानचंद मर्मज्ञ
bahut khoob..dipti antim line me jagti hue ke sthan par yadi jagti hui ek aasha hoon likho to mere vichar me aur achchha rahega.vaise swayam ka vishleshan bahut sundar kiya hai...mere blog par aane ke liye aabhar.aage bhi aayen aur mera utsah badhayen.....
UNBEATABLE ji, Kunwar Kusumesh ji, sandhya ji, उपेन्द्र ' उपेन ' ji, विनोद कुमार पांडेय ji, संजय भास्कर ji, ज्ञानचंद मर्मज्ञ ji, ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι ji, Harsh ji, Patali-The-Village , muskan ji, 'उदय ji, अभिषेक मिश्र ji ,ashish ji, ana ji, प्रवीण पाण्डेय ji, मनोज कुमार ji, राकेश कौशिक ji, SATYAM ,ललित शर्मा ji, अन्तर्द्वन्द ji,mrityunjay kumar rai ji,amar jeet ji, mark rai ji, अरूण साथी ji,'अदा'ji, Kishore Choudhary ji, सतीश सक्सेना ji, नीरज गोस्वामी ji, pragya ji, shalini kaushik ji, deepak saini ji, Vilas Pandit ji,ehsas ji, ZEAL ji,अनुपमा पाठक ji, ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ji,Shah Nawaz ji, mahendra verma ji, mridula pradhan ji,Sunil Kumar ji,इमरान अंसारी ji
बेहद भाव पूर्ण रचना । दीप्ती जी जो चित्र आपने इस रचना के लिये चुना , इसे एक बार हम भी अपनी रचना पर लाये थे , शायद ये हम लोगो के मिलते खयालात की निशानी है ।
तुमने पुकारा औऱ हम चले आए...... आकर पता चला कि पहले भी बिन बुलाए चले आए थे.... टिप्पणी के निशां नहीं छोड़ के चले थे.... इत्ती तारीफ लोगो ने कर दी है कि कुछ कहने को बचा है क्या।
इन सभी 67 लोगो की तारीफ मेरी समझ कर कबूल कर लो। आशाओं से भरी कविताएं हैं......
आपकी रचना को पढ़ कर सुखद अनुभूति हुई। कल नेताजी सुभाषचंद बोस की जयन्ती थी उन्हें याद कर युवा शक्ति को प्रणाम करता हूँ। आज हम चरित्र-संकट के दौर से गुजर रहे हैं। कोई ऐसा जीवन्त नायक युवा-पीढ़ी के सामने नहीं है जिसके चरित्र का वे अनुकरण कर सकें? ============================ मुन्नियाँ देश की लक्ष्मीबाई बने, डांस करके नशीला न बदनाम हों। मुन्ना भाई करें ’बोस’ का अनुगमन- देश-हित में प्रभावी ये पैगाम हों॥ =========================== सद्भावी - डॉ० डंडा लखनवी
वो कैसी आह की परछाई हैं मैंने खुद को लहरों मे डुबो, तूफानों से ये कश्ती बचायी है | जिस पर अब तक सम्भल मेरी जिंदगी चली आई है | हैं राहें कश्मकस भरी , अजनबी लोगो में रह किस तरह बात समझ पाई है | मुददत से अकेली हूँ मैं , तमन्नाये जीने की मैने तो ये बाजी खुद ही गंवाई है | वो गैरों के भरोसये शौक में आह में डूब ढलती हुई , फिरती वो मेरी ही परछाई है | - दीप्ति शर्मा
हर इन्सान में ज़ज्बा है सच बोलने का फिर भी वो झूठ से बचा नहीं है | पहना है हर चेहरे ने एक नया चेहरा और जीता है जिन्दगी जब वो बोझ समझ पर , जिन्दगी उसकी सजा नहीं है वो झूठ से बचा नहीं है | खुद को पहचान वो चलता है उन रास्तो पर जहाँ खुद को जानने की उसकी कोई रजा नहीं है वो झूठ से बचा नहीं है| कहता तो है हर बात बड़ी ही सच्चाई से पर नजरें कहती है उसकी कि उसके पास सच बोलने की कोई वजह नहीं है इसलिए ही तो वो झूठ से बचा नहीं है | इसमें उसकी खता नहीं है | - दीप्ति शर्मा
क्यूँ दर्द समझ कर भी, नासमझ बना करते हैं| वो पत्थर के रोने को झरना कहा करते हैं और उसे देख के हँसते हैं | खलिश दबा सीने में तन्हा जीया करते हैं , तमन्ना नही कोई बस में जान के हर अश्क का अफ़सोस किया करते हैं, वो पत्थर के रोने को झरना कहा करते हैं और उसे देख के हँसते हैं| तस्कीरे बना हर इल्ज्म को अधिकार दिया करते हैं, दिल के जख्मो को जो नकार दिया करते हैं, इंसानों के आंसू को देखा भी नही करते हैं, वो पत्थर के रोने को झरना कहा करते हैं, और उसे देख के हँसते हैं | - दीप्ति शर्मा
Comments
दीप्ती ! ये पल जिया तुमने बड़ी अच्छी तरह.
My good wishes are always with you.
Ek to khoobsoorat se sawal aur unke laajawab se uttar sab kuchh hai in panktiyon me........ beautiful
.
नये दसक का नया भारत (भाग- १) : कैसे दूर हो बेरोजगारी ?
sundar shabd chayan aur sundar bhav...is rachana ke liye badhai..
It is pleasure reading your poems.
जज्बातों से पलते
ख़्वाब की परिभाषा हूँ !"
सुन्दर ,गहरी अभिव्यक्ति लिए हुई पंक्तियों के लिए बधाई !
ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ
बहुत सुन्दर रचना, मुबारकबाद।
मेल से भेज दिया करो लिंक
आभार
this is my first visit on ur blog. it is worthy blog. ur musings are really fantsatic
वैसे आपके पेपर कैसे बने बताइयेगा
aapka blog thoda alag ehsaas liye hue hai..bahut achcha laga yahan par aakar...
बहुत
सुन्दर रचना
हार्दिक शुभकामनायें !
आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ..
नीरज
बधाई
---------
पति को वश में करने का उपाय।
मासिक धर्म और उससे जुड़ी अवधारणाएं।
छोटी पर बढ़िया पोस्ट ....बहुत अच्छी लगी.....आखिरी पंक्ति में 'हुए' की जगह 'हुई' होना चाहिए था....बाकि बहुत सुन्दर लगी ये पोस्ट....शुभकामनायें|
muskan ji, 'उदय ji, अभिषेक मिश्र ji ,ashish ji, ana ji,
प्रवीण पाण्डेय ji, मनोज कुमार ji, राकेश कौशिक ji, SATYAM ,ललित शर्मा ji, अन्तर्द्वन्द ji,mrityunjay kumar rai ji,amar jeet ji, mark rai ji, अरूण साथी ji,'अदा'ji, Kishore Choudhary ji, सतीश सक्सेना ji, नीरज गोस्वामी ji,
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आप सभी ने मेरे प्रयास को सराहा
उसके लिए बहुत आभार
मैने हुए की जगह हुई कर लिया है
वहा हुई ही था पर गलती से हुए लिख गया
आपका साभार
इतने प्यारे हैं जज्बात तो फिर ...........
किसी और कि जरूरत नहीं ...........
बहुत खुबसूरत एहसास !
सुन्दर रचना
जगती हुई मैं आशा हूँ
क्या आत्म विश्वास है...कहीं पर अस्तित्व बोध का एहसास हो जाता है ..बहुत बहुत शुक्रिया
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
धन्यवाद
जज्बातों से पलते
ख़्वाब की परिभाषा हूँ !"
बहुत सुन्दर रचना
आभार
बहुत सुन्दर एहसास ....
आशा कभी अकेली नहीं होती ....उस के साथ कई ख्वाब चलतें है ..आप भी नहीं हैं ...मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार .
rachna pasand aaiiiiiiiiiii
दीप्ती जी जो चित्र आपने इस रचना के लिये चुना , इसे एक बार हम भी अपनी रचना पर लाये थे , शायद ये हम लोगो के मिलते खयालात की निशानी है ।
आकर पता चला कि पहले भी बिन बुलाए चले आए थे....
टिप्पणी के निशां नहीं छोड़ के चले थे....
इत्ती तारीफ लोगो ने कर दी है कि कुछ कहने को बचा है क्या।
इन सभी 67 लोगो की तारीफ मेरी समझ कर कबूल कर लो। आशाओं से भरी कविताएं हैं......
सुन्दर आशावादी रचना. :)
उत्कृष्ट लेखन का नमूना
लेखन के आकाश में आपकी एक अनोखी पहचान है ..
ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया !
Shivkumar
ek baar jara hamare blog par akar hamari rachana ke baare me kuchh salah dijiy.....
dhanybaad.....
भावाव्यक्ति का अनूठा अन्दाज ।
बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति ।
ऐसी sakaratmak रचना पढवाने के लिए शुक्रिया
- अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"
amanagarwalmarwari.blogspot.com
marwarikavya.blogspot.com
आपको बधाई
आभार
kripya yuhi margdarshan karte rahe
dhanyvad
बधाई आखिर तुमने ठीक कर लिया....पर यह टेम्पलेट सही नहीं लगा मुझे अंको में तकलीफ होती है कोई साधारण सा इस्तेमाल करो जो आँखों को अच्छा लगे....
कल नेताजी सुभाषचंद बोस की जयन्ती थी
उन्हें याद कर युवा शक्ति को प्रणाम करता हूँ।
आज हम चरित्र-संकट के दौर से गुजर
रहे हैं। कोई ऐसा जीवन्त नायक युवा-पीढ़ी
के सामने नहीं है जिसके चरित्र का वे
अनुकरण कर सकें?
============================
मुन्नियाँ देश की लक्ष्मीबाई बने,
डांस करके नशीला न बदनाम हों।
मुन्ना भाई करें ’बोस’ का अनुगमन-
देश-हित में प्रभावी ये पैगाम हों॥
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सद्भावी - डॉ० डंडा लखनवी
डॉ० डंडा लखनवी ji,
संजय भास्कर ji
aap sabhi ka bahut aabhar
kripaya
yuhi
margdarshan karte rahen