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Showing posts from June, 2011

आखिर क्यूँ ?

मंज़िल तो हैं सीधी पर  रास्ते ये सारे मुड़े क्यूँ हैं ? और तकदीर से ये हमारी जुड़े क्यूँ हैं ?
जब होती नहीं कोई भी मुराद पूरी तो  दर पर ख़ुदा के  इबादत को इंसा के सर झुके क्यूँ हैं ?
ख़ुदा ना ले इम्तिहान कोई अब हमारा  तो कभी यूँ लगे कि इम्तिहानों के सिलसिले  रुके तो रुके क्यूँ  हैं ?
सुन ले ए ख़ुदा अब    हमारी हर मुराद  जब मुराद ना हो पूरी  तो लगे कि अब  ख़ुदा कि फ़रियाद में ये हाथ खड़े क्यूँ हैं ? 
तेरी रहमत को ये ख़ुदा  हम खड़े क्यूँ हैं ? पाने को हर सपना  आखिर हम अड़े क्यूँ  हैं ?
- दीप्ति शर्मा