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ख़ामोश रही मैं|

क्यूँ तुझे पाने तक,
तेरे पास आने तक,
यूँ ख़ामोश रही मैं|
लेके एहसास  तेरा,
दिल में  प्यार तेरा,
यूँ  ख़ामोश रही मैं |
अजनबी परछाई थी ,
अश्क आँखों में लिए,
तेरी याद बहुत आई थी,
याद लिए तेरी दिल में,
यूँ ख़ामोश रही मैं|
जब से तू चला गया,
तेरी वो महक तब से,
इस तन में समायी थी,
तू समा जाये मुझमें ,
मैं समाऊं तुझमे,
ये सोच आज तक ,
यूँ ख़ामोश रही मैं|
जैसे  तेरे आने की,
दिल को आहट थी |
- दीप्ति शर्मा 

Comments

prashant said…
teri khamoshi teri kalam ke shor me najar aati hai
abhi waqt bahut hai deepti isi tarah se sohrat payi jaati hai.
अजनबी परछाइयों के बिछोड़े... वाह !

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मैं चीख रही ,
मेरा लहू धधक रहा
कहीं सड़क लाल तो
कहीं बदरंग हो रही
पर ना बिजली चमकी
ना बरसात हुई
ना आँधी आयी
आयी तो उदासी
बस नसीब में मेरे
सुन ख़ुदा !
तू बहरा हो गया क्या ?
-दीप्ति शर्मा
नीले आसमां को देखती
निगाहों की टकटकी,
आँखों से रिसते पानी को
सुबह की ओस से
रात का तारा बना देती  है ।
@दीप्ति शर्मा