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तेरी राह

ढूंढा हर किनारा,
हर महफ़िल तलासी,
हर गली ढूंढ़ ली हर राह ,
पर तेरी राह ना मिली |
उस किनारे पे जहाँ ,
हम मिले थे कभी,
वहा जहाँ बीते लम्हे,
गुजरे थे कभी|
ढूंढ़ ली हर राह,
पर तेरी राह ना मिली|
तेरी यादो को ढूंढा,
तेरी बातों को ढूंढा,
तेरे चलने के उन,
पदचिन्हों को ढूंढा,
ढूंढ़ ली हर राह,
पर तेरी राह ना मिली |

Comments

vikas chaudhary said…
feelings of the searching the paradise.........
to b continuted.........
मनमोहक ब्लॉग - सुंदर भावात्मक रचना
दीप्ती जी
आपकी रचनायें देखी। आपसे निवेदन है कि रोमन लिपि के साथ देवनागरी लिपि में भी शीर्षक लिखा करें। आपको मेरी शुभकामनायें।
दीपक भारतदीप
Layak Singh said…
nice n beautiful thoughts!!!!!!!

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !