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विश्वास

नहीं होता  विश्वास उन बातों पे,
ना जाने दिल क्या चाहता है
तुझ पे विश्वास है खुद से ज्यादा
पर क्यों नही आज यकीं होता है
सोचा की ये यकीं मजबूत है
बुलंदियों पे है होसला  मेरा
तुझे चाहने का तुझे पाने का
पर अब मेरे इस दिल को
नही होता विश्वास उन बातों पे |
जिसकी हर बात पे आँखे मूंद
मैने विश्वास किया कभी
पर आज ये डगमगा रहा क्यों?
नहीं विश्वास होता उन ख्वाबो पे
जो इन आँखों ने देखे तुझे पाने के
दिल इतना कमजोर कैसे हो गया
विश्वास था जिस पे खुद से ज्यादा
क्यों आज उसकी बातों पे
कैसे भी विश्वास नहीं होता |

Comments

Atul Sharma said…
हिन्दी ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है। विश्वास बना रहे। विश्वासघात न हो। सुंदर कविता।

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !