क्यूँ दर्द समझ कर भी, नासमझ बना करते हैं| वो पत्थर के रोने को झरना कहा करते हैं और उसे देख के हँसते हैं | खलिश दबा सीने में तन्हा जीया करते हैं , तमन्ना नही कोई बस में जान के हर अश्क का अफ़सोस किया करते हैं, वो पत्थर के रोने को झरना कहा करते हैं और उसे देख के हँसते हैं| तस्कीरे बना हर इल्ज्म को अधिकार दिया करते हैं, दिल के जख्मो को जो नकार दिया करते हैं, इंसानों के आंसू को देखा भी नही करते हैं, वो पत्थर के रोने को झरना कहा करते हैं, और उसे देख के हँसते हैं | - दीप्ति शर्मा
Comments
आपको सपरिवार श्री कृष्णा जन्माष्टमी की शुभकामना ..!!
बड़ा नटखट है रे .........रानीविशाल
जय श्री कृष्णा
KYA KAHA HAI ......BAHUT ACCCHA DEEPTI JI!!!!!!
A Silent Silence : Mout humse maang rahi zindgi..(मौत हमसे मांग रही जिंदगी..)
Banned Area News : Has Shravani Counting Her Days?
bahut hi accha likha hai.
jo apne apna kimti samaye mujhe diya
one think is for u----
hamari galtio ko bhulate rhna.
zindgi bhr ye rista nibhate rhna.
agr hm na chl ske to aap kadm se kadm milate rhna..
बहुत अच्छी कविता है
जो कहना है
कह दो,
तुम इन्सान हो
भगवान नहीं !
इतनी सादगी के साथ आसानी से बात कह देना बहुत बड़ी कला है ।
बधाई और शुभकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार