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बताऊँ मैं कैसे तुझे ?

वो लम्हे हमें हैं अब याद आते ,
ना भूले हैं जानम ना भूल पाते ,
बताऊँ मैं कैसे तुझे ?
वो लहरों की कस्ती ,
वो फूलो की वादी ,
सितारों की झिलमिल ,
 कहाँ खो गयी ,
बताऊँ मैं कैसे तुझे ?

वो चूड़ी की छनछन ,
वो पायल की खनखन ,
कहाँ खो गयी ,
बताऊँ  मैं कैसे तुझे ?

वो कोयल की कूंह कूंह ,
 वो झरने का झरना ,
 रिमझिम सी बारिश,
 कहाँ खो गयी ,
बताऊँ मैं कैसे तुझे ?

 फूलों की ख़ुशबू ,
 महकता वो आँगन ,
 मोहब्बत वो मेरी ,
 कहाँ  खो गयी ,
 बताऊँ  मैं कैसे तुझे ?


- दीप्ति 

Comments

M VERMA said…
कश्मकश की अंतर्कथा
UNBEATABLE said…
tumhara Likha padh kar lagtaa hai jaisee shabdo ke saath beh rahe ho ... Bahut Sundar ...
Sunil Kumar said…
sundar abhivayakti badhai
लगता है काश्मीर की वादी की यादों में लिखा है ....खूबसूरत अभिव्यक्ति
Bhavnaon ki bahut sundar abhivyakti...
http://sharmakailashc.blogspot.com/
m verma जी आपका आभार
UNBEATABLE जी आपका आभार
Sunil Kumar जी आपका आभार
This comment has been removed by the author.
संगीता स्वरुप ( गीत ) जी आपका आभार
This comment has been removed by the author.
This comment has been removed by the author.
Kailash C Sharma जी आपका आभार
ashish said…
वाह वाह , सुन्दर अभिव्यक्ति
दीप्ति.... बहुत अच्छा तुम्हारे ब्लॉग पर आकर..... पूरा ब्लॉग देखा .... हर रचना बहुत अच्छी लगी..... अबसे आता रहूँगा....
Kunwar Kusumesh said…
आपके ब्लॉग पे आपकी कविता पढ़ी. अच्छी है.
लेखन में नैरन्तर्य बनाये रक्खें.

कुँवर कुसुमेश
समय हो तो मेरा ब्लॉग देखें:kunwarkusumesh.blogspot.com
चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 5-10 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

http://charchamanch.blogspot.com/
ashish जी आपका आभार
This comment has been removed by the author.
महफूज़ अली जी आपका आभार
Kunwar Kusumesh जी आपका आभार
भावपूर्ण अभिव्यक्ति ।
जुदाई में विरह के दर्द से लबरेज़ मसूम कविता के लिये रचनाकारा को मुबारक बाद।
बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति.....
sada said…
बेहतरीन शब्‍द रचना ।
http://charchamanch.blogspot.com/2010/10/19-297.html

यहाँ भी आयें .
संगीता स्वरुप ( गीत ) जी मैंने चर्चामंच देखा आपका आभार
अजय कुमार जी शुक्रिया
ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι जी शुक्रिया
डॉ. मोनिका शर्मा जी शुक्रिया
sada जी शुक्रिया
बहुत खुबसूरत कविता .......पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ ....सबसे शानदार लगी ऊपर लगी कबूतर की तस्वीर .......बहुत खूब |

कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए-
http://jazbaattheemotions.blogspot.com/
http://mirzagalibatribute.blogspot.com/
http://khaleelzibran.blogspot.com/
http://qalamkasipahi.blogspot.com/

एक गुज़ारिश है ...... अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये|
इमरान अंसारी ji dhanyvad
ha kyu nhi mai aapka blog jarur dekhugi
जज़्बात पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया ......... अभी कुछ देर पहले ही आपके ब्लॉग से गया ....फॉलो करना भूल गया था ...खैर अब गलती को सुधार लेता हूँ |
योगेन्द्र मौदगिल ji dhanyvad
खूबसूरत अभिव्यक्ति.
monali said…
Sundar kavita...
Udan Tashtari said…
भावपूर्ण अभिव्यक्ति..अच्छा लगा पढ़ कर. नियमित लिखें, शुभकामनाएँ.
जिंदगी के कशमकश को बाखूबी से उतरा है इन लाइनों में ... बहुत अच्छी लगी रचना .. ...
अनामिका की सदायें ... आपका आभार
monali ji आपका आभार
Udan Tashtari आपका धन्यवाद
दिगम्बर नासवा ji आपका धन्यवाद
बहुत पसन्द आया
हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
बहुत देर से पहुँच पाया ........माफी चाहता हूँ..
anu said…
सुंदर भावनाओ से परिपूर्ण रचना ....

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा