Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - December 19, 2012 घुटती रही जिंदगी तहख़ानों के बीच अपने ही जहर खिलाते रहे निवालों के बीच यूँ तो कशमकश भरी हैं राहें मेरी रोती भी कैसे रहकर दिलवालों के बीच । © दीप्ति शर्मा Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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