Skip to main content

जिन्दगी

जिंदगी की सच्चाई
को छुपाते हुए
हर हाल में बस
मुस्कुराते हुए
गुजर जाता है लम्हा
कभी कभी ।
गुजरे इस जीवन में
क्या जीवन भी
गुजर सकता है?
शायद हाँ
शायद नहीं भी
बिन सच्चाई अपनाये
ना जिंदगी को समझाये
गुजर तो नहीं सकता
हाँ कट सकता है लम्हा
सच की यादों में
कुछ किस्से पिरोकर
विश्वास के धागे में
लम्हा बढ़ सकता है
जीवन कट सकता है
पर अगर कहीं
सच्चाई मिल जाये
जो विश्वास में
तो एक एक मोती
हकीक़त का जैसे
जुड़ने लगेगा
तब ये लम्हा
गुज़रने लगेगा
और जिंदगी भी
गुजर जायेगी
हँसते हँसते ।
© दीप्ति शर्मा


Comments

Popular posts from this blog

जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मैं चीख रही ,
मेरा लहू धधक रहा
कहीं सड़क लाल तो
कहीं बदरंग हो रही
पर ना बिजली चमकी
ना बरसात हुई
ना आँधी आयी
आयी तो उदासी
बस नसीब में मेरे
सुन ख़ुदा !
तू बहरा हो गया क्या ?
-दीप्ति शर्मा
नीले आसमां को देखती
निगाहों की टकटकी,
आँखों से रिसते पानी को
सुबह की ओस से
रात का तारा बना देती  है ।
@दीप्ति शर्मा