Sunday 14 August 2011

क्यों?

                                                     
इन हौसलों में आके 
भी आँखों में नमी क्यों? 
राहें चल रही हैं पर 
मंजिल की चाह में
है जमीं थमी क्यों?
है आँखों में नमीं क्यों?

अपनों के साथ भी
हूँ मैं अब हरदम 
फिर भी न जाने क्यों?
है किसी की कमी क्यों? 
हैं आँखों में नमी क्यों? 

- दीप्ति शर्मा 

18 comments:

Anonymous said...

khubsurat rachna

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

क्यूँ का जवाब बहुत कठिन है ।
बहुत ही बढ़िया कविता।

सादर

दीनदयाल शर्मा said...

न जाने कौन, कब , कैसे मेरी हँसी ले गया..
मैं तो खुली किताब था..मुझको दगा दे गया...
- दीनदयाल शर्मा

Manish Kr. Khedawat " मनसा " said...

uski kami jo hai :')

kshama said...

Apnon ke saathrahte hue bhee jab aankhon me namee bastee hai,to bada dukh hota hai.
Wishing you a very happy Independence Day!

Kailash C Sharma said...

बहुत संवेदनशील प्रस्तुति..

प्रवीण पाण्डेय said...

दमदार अभिव्यक्ति।

chirag said...

touching poem

डॉ० डंडा लखनवी said...

मातॄ - भूमि ने तो दिए, तुझे कोटि उपहार।
तू भी अपने सिर चढ़ा, कर्जा कभी उतार॥

संजय भास्कर said...

I appreciate for your poem...nice... amazing writing .......

satyendr sengar said...

bahut achchha

राजेश चड्ढ़ा said...

शायद कोई कमी ही आंखों में नमी लाती है......अच्छी रचना..शुभकामनाएं

Dr_JOGA SINGH KAIT "JOGI " said...

dipti ji saral,saras rachana,bahut badia yadi duniyan m kyun na hota to jawab bhi naa hote,kyun hone par hi to jawab dhundhe jate hain or vo mil bhi jaten hain ,koyi to dhundhata hi hain .sadhuwad.

NEELKAMAL VAISHNAW said...

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

2- BINDAAS_BAATEN: व्यंगात्मक क्षणिकाएं......


3- MADHUR VAANI: व्यंगात्मक क्षणिकाएं......

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

संवेदनशील रचना !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

prerna argal said...

बहुत ही भावनाओं से लिखी बहुत ही शानदार रचना /दीप्तिजी आपको बहुत बहुत बधाई /




please visit my blog.http://prernaargal.blogspot.com/
thanks.

शिखा कौशिक said...

गहन भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति .आभार
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