dipti ji saral,saras rachana,bahut badia yadi duniyan m kyun na hota to jawab bhi naa hote,kyun hone par hi to jawab dhundhe jate hain or vo mil bhi jaten hain ,koyi to dhundhata hi hain .sadhuwad.
नमस्कार.... बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........ आपका ब्लागर मित्र नीलकमल वैष्णव "अनिश"
इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
18 comments:
khubsurat rachna
क्यूँ का जवाब बहुत कठिन है ।
बहुत ही बढ़िया कविता।
सादर
न जाने कौन, कब , कैसे मेरी हँसी ले गया..
मैं तो खुली किताब था..मुझको दगा दे गया...
- दीनदयाल शर्मा
uski kami jo hai :')
Apnon ke saathrahte hue bhee jab aankhon me namee bastee hai,to bada dukh hota hai.
Wishing you a very happy Independence Day!
बहुत संवेदनशील प्रस्तुति..
दमदार अभिव्यक्ति।
touching poem
मातॄ - भूमि ने तो दिए, तुझे कोटि उपहार।
तू भी अपने सिर चढ़ा, कर्जा कभी उतार॥
I appreciate for your poem...nice... amazing writing .......
bahut achchha
शायद कोई कमी ही आंखों में नमी लाती है......अच्छी रचना..शुभकामनाएं
dipti ji saral,saras rachana,bahut badia yadi duniyan m kyun na hota to jawab bhi naa hote,kyun hone par hi to jawab dhundhe jate hain or vo mil bhi jaten hain ,koyi to dhundhata hi hain .sadhuwad.
नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"
इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्
1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......
2- BINDAAS_BAATEN: व्यंगात्मक क्षणिकाएं......
3- MADHUR VAANI: व्यंगात्मक क्षणिकाएं......
संवेदनशील रचना !
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
बहुत ही भावनाओं से लिखी बहुत ही शानदार रचना /दीप्तिजी आपको बहुत बहुत बधाई /
please visit my blog.http://prernaargal.blogspot.com/
thanks.
गहन भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति .आभार
BLOG PAHELI NO.1
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