आज बैठी हूँ और
सोच रहीं हूँ तुझे
तुझसे मिलने को मन
करता है और कहता है
आजा मेरी बहन घर
सूना है तेरे बगैर |
जब खाते थे एक
ही थाली में खाना
लड़ना झगड़ना और
रूठ के मान जाना
आजा मेरी बहन घर
सूना है तेरे बगैर |
एक्टिवा पर बाज़ार
निकल घूमना पूरे दिन
पर अकेले मन नही
करता अब तो जाने का
आजा मेरी बहन घर
सूना है तेरे बगैर |
एक साथ स्कूल जाना
खेलना खाना और पढना
हँसना खूब मस्त रहना
अब तू हम सबके पास
आजा मेरी बहन घर
सूना है तेरे बगैर |
माँ भी पूछती है
अब कब आयेगी तू
तेरी याद करती है और
हम तारें हैं उनकी आँखों के
कैसे रह पायेगी वो
यूँ दूर हमसे तो अब
आजा मेरी बहन घर
सूना है तेरे बगैर |
-दीप्ति शर्मा


20 comments:
vo jald hi aagengi
shubhkamnaye
मन को छू जाने वाले भाव।
------
ब्लॉगसमीक्षा की 27वीं कड़ी!
आखिर इस दर्द की दवा क्या है ?
बहुत ही सुंदर .....प्रभावित करती बेहतरीन पंक्तियाँ ....
फ्रेंडशिप डे ' की आपको ढेर सारी शुभकामनाएँ ..... |
बहुत ही सुंदर .....प्रभावित करती बेहतरीन पंक्तियाँ ....
फ्रेंडशिप डे ' की आपको ढेर सारी शुभकामनाएँ ..... |
मेरे अनुसार सुना को सूना में बदल लीजिये . बहुत सुन्दर रचना.
सम्बन्धों के कोमल भाव।
sundar, manbhaavan
बहुत सुन्दर बहनों का ये प्रेम दिल को छू लेने वाला है|
मर्मस्पर्शी कविता।
------------
कल 09/08/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
superb creation !!!
मर्मस्पर्शी रचना...
बहुत खूब्सुरातिसे बहन को याद कर बचपन को भी याद कर लिया ..अच्छी प्रस्तुति
wah sharma ji...
kamal karte ho
hamare blog par bhi darshan de
umeed hai ki aapki behan aapse jaldi hii milengi...behan ko yaad akrti ...achchhi rachna
बहुत ही सुन्दर भावमय करते शब्दों के साथ बेहतरीन प्रस्तुति ।
सुंदर भावों से सजी कविता...
बहनें तो होती ही इतनी प्यारी हैं कि उनके बिना घर सूना लगने लगे
bahut sundar..
bahno ke bina suna to lagta hi ghar...
chahal-pahal jo bani rahti hai.sabka khayal jo rakhti hain..
wakai bahan bahan to hoti hai par dost bhi hoti hai... uski kami khalti hai...
bahut hi pyaaree rachna...
A topic near to my heart thanks, ive been wondering about this subject for a while.
Post a Comment