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अन्ना तेरी अगवानी में|

                                         
क्या करूँ मैं व्याख्यान 
निरुत्तर हो गयी सरकार
अब हो रहा समाधान 
अन्ना तेरी अगवानी में|

अंहि बन देश के गौरव का 
अजब का उत्साह है 
हम सब का साहस बढा
अन्ना तेरी अगवानी में|

अधिप बन शासन किया 
फैलाया भ्रष्टाचार सरकार ने 
पर अब हो रहा समाधान
अन्ना तेरी अगवानी में|

अंतस से उठी आवाज़ 
और है लोगो का साथ 
अब हो रहा समाधान
अन्ना तेरी अगवानी में|

अदबी समाज साथ है
कलम उनके हाथ है
हौसला बढ रहा हमारा
अन्ना तेरी अगवानी में|

मुफ्तखोरी बन बहुत खाया 
लोगो को खूब नचाया 
अब हो जाएँ ये अंतरध्यान
अन्ना  तेरी अगवानी में|
  - दीप्ति शर्मा 


Comments

Anonymous said…
aamin
ARIHANT JAIN said…
बहुत अच्छा लिखा,आपको सलाम, अन्ना को सलाम।
रेखा said…
बहुत ही सार्थक लिखा है आपने ......जय हिंद
जब जनता उठ खड़ी हुई है तो ज़रूर होगा समाधान.
Bahut badhiya prernadai rachna.Bahut badhiya prernadai rachna.
JAGDISH BALI said…
But still I doubt the intention of the Govt. They will not axe their feet.
prem said…
sundar rachna deepti ji.........
देश को सुखद भविष्य की प्रतीक्षा है।
आपको एवं आपके परिवार "सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया"की तरफ से भारत के सबसे बड़े गौरक्षक भगवान श्री कृष्ण के जनमाष्टमी के पावन अवसर पर बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें लेकिन इसके साथ ही आज प्रण करें कि गौ माता की रक्षा करेएंगे और गौ माता की ह्त्या का विरोध करेएंगे!

मेरा उदेसीय सिर्फ इतना है की

गौ माता की ह्त्या बंद हो और कुछ नहीं !

आपके सहयोग एवं स्नेह का सदैव आभरी हूँ

आपका सवाई सिंह राजपुरोहित

सबकी मनोकामना पूर्ण हो .. जन्माष्टमी की आपको भी बहुत बहुत शुभकामनायें
सार्थक लिखा है आपने
अन्ना को सलाम

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !