रेखाएँ Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - May 16, 2013 हाथ की कुछ रेखाएँ अब गहरी हो गयी हैं ना जाने ये किस बात का अंदेशा है नये जीवन के आगमन का या इस जीवन की मुक्ति का -दीप्ति शर्मा Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments Anonymous said… suruaat hone ko hai कालीपद "प्रसाद" said… हाथ की लकीरें नहीं हाथ का कर्म ही तगदीर बनता हैडैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति कोlatest post हे ! भारत के मातायोंlatest postअनुभूति : क्षणिकाएं babanpandey said… अगर सोचे तो हाथ की लकीरें भी बालू पर खिची लकीरें है ... नहीं तो बहुत कुछ .. mere bhi blog par aaye babanpandey said… अगर सोचे तो हाथ की लकीरें भी बालू पर खिची लकीरें है ... नहीं तो बहुत कुछ सु-मन (Suman Kapoor) said… सुंदर Manav Mehta 'मन' said… बढ़िया निरुपमा said… abhut khoob
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हाथ की लकीरें नहीं हाथ का कर्म ही तगदीर बनता है
डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
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