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दीवाना

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दीवाना   जिसे हम कहते हैं  दीवाना  सही पर है वो क्या  आखिर क्यूँ ये जमाना  दिल वालो को  दीवाना  कहता है  दीवाने की पहचान है क्या हम किसे दिवाना कहते हैं  दिवाना जिसे हम कहते हैं  दिवाना सही पर है वो क्या  वक़्त वो लम्हा है कौन सा  जब ये दीवाने आते हैं  दिखते कैसे  चलते कैसे  इनकी कुछ पहचान तो दो  कोई आके इस दिल को बताये  की कैसे  ये दीवाने होते हैं दीवाना    जिसे हम कहते हैं  दीवाना  सही पर है वो क्या  ये मैने तब लिखा जब मैं ८ क्लास में थी तब मुझे कविता का मतलब भी ठीक से पता नही था पर जो दिल ने कहा लिख दिया पर आज मैं आप सब को वो जरुर पढाना  चाहूंगी  - दीप्ति 

गम

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जीना है सीखा इस गम से , पीना है सीखा इस गम से , हम हैं गम से  गम हैं हम से | ये जो जिंदगानी है हमसे , और मोहब्बत है तुमसे | खुशिया हैं जो तुमसे  वो डूब गयी मेरे गम से |                                  - दीप्ति 

विजय पर्व

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यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत याद दिलाता है| आज के समय में कितने ही रावण यूँ ही घूमते हैं पर उनका नाश करने में हम भले ही असमर्थ हो पर हृदय में श्री राम को रख उनसे जूझने   का होसला तो ला ही सकते हैं | और बुराई पर जय की विजय की कोशिश तो कर ही सकते हैं |   जय राम जय राम जय जय राम  श्री राम चन्द्र की जय   विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाये 

ऐसा एक संसार बनाऊं

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ऐसा एक संसार बनाऊं , ना हो जहाँ गम का अँधियारा | हर इंसा को मिले जहाँ , कश्ती का हर किनारा , महफ़िलें तो हो बहुत पर, गम का ना नामों निशाँ हो , ऐसा एक संसार बनाऊं , ना हो जहाँ गम का अँधियारा | मुश्किलें मिल जाये कहीं तो , आसाँ हो जाये ये रास्ता तुम्हारा , अरमाँ हो  पूरे दिल के सभी , और खिल जाये मुस्कान से , वो खुशनुमा चेहरा तुम्हारा| ऐसा एक संसार बनाऊं , ना हो जहाँ गम का अँधियारा | - दीप्ति 

बताऊँ मैं कैसे तुझे ?

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वो लम्हे हमें हैं अब याद आते , ना भूले हैं जानम ना भूल पाते , बताऊँ मैं कैसे तुझे ? वो लहरों की कस्ती , वो फूलो की वादी , सितारों की झिलमिल ,   कहाँ खो गयी , बताऊँ मैं कैसे तुझे ? वो चूड़ी की छनछन , वो पायल की खनखन , कहाँ खो गयी , बताऊँ  मैं कैसे तुझे ? वो कोयल की कूंह कूंह ,   वो झरने का झरना ,   रिमझिम सी बारिश,   कहाँ खो गयी , बताऊँ मैं कैसे तुझे ?   फूलों की ख़ुशबू ,   महकता वो आँगन ,   मोहब्बत वो मेरी ,   कहाँ  खो गयी ,   बताऊँ  मैं कैसे तुझे ? - दीप्ति 

ज़िम्मेदार कौन ?

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उम्र महज ५ बरस , और मासूम मन  में हैं कई सवाल ,इस उम्र मे ही माँ बाप  का अलगाव , वो विछोह जो उसके नन्हे दिल मे कई सवाल ले आता | उस बाल मन को झकझोर देने वाली ये घटना उसके मन में ऐसा प्रभाव डालेगी की कोई सोच नही सकता| समय बीता|  वो बड़ी हो गयी  बाप का साथ नहीं है, और माँ दिन भर पार्टी और पोलिटिक्स में व्यस्त रहती | वो कॉलेज जाने लगी , वहा उसे हमउम्र लड़के से  प्यार हो गया, पर कुछ समय बाद वो डोर टूट  गयी  जिससे वो परेशान हो गयी और उसने पुलिस का सहारा लिया और लड़के को जेल भिजवा दिया | वो इतना परेशान थी की कोई चाहिए था उसे जो उसका अपना हो | तभी उसकी मुलाकात विक्की से हुई जो अपराधी प्रवत्ति  का था |धीरे धीरे वो उस से प्यार करने लगी और उसके साथ रहते हुए वो भी गुनाह के रस्ते पर चल पड़ी | फिर क्या था ? वो उसके साथ लोगो को ठग रही थी कई बार कई जगह , सिलसिला थमा नहीं और एक दिन वो पुलिस के हाथ लग गयी उसके पास करोडो रुपये थे जो उसने इस तरह कमाए | आज वो जेल में है | एक लड़की के गेंगेस्टर बन जाने की यह कहानी सबके लिए सबक है  पर इसके लिए जिम्मेदार कौन? ...

ये कैसी रौशनी

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जब  कभी  हम बहुत दूर जाना चाहते हैं  और बिना सोचे चल देते हैं  तो कभी उसका परिणाम भयावह भी हो सकता है  इसे कविता तो नहीं कहुगी पर ये वो  शब्द  हैं जो मेरे दिल ने कहे.... दूर  जहाँ रौशनी थी , कदम बढाये थे उसने , हौसला  भी तो  था| था  उल्लास  इतना कि , सब  भूल पहुँचाना चाहती थी  वो तो, उस रौशनी तक | डगमगा रहे थे कदम  ना जाने कितनी , दूर हो मंजिल | बस एक आभास, ही तो था उस  रौशनी  , के दूर होने का| जो अपने पास , उसे बुलाती थी\ उमंग थी उसे उस रौशनी मे समा जाने की| उसके आगोश मे  लिपट जाने की | दर्द झेल सामना , किया था मुस्किलो का, पहुँचने को रौशनी   तक\ आखिर पहुच गयी , उस रौशनी तक  अपनी मंजिल समझ | नादाँ थी  लगा था  एक वही मंजिल है जब पहुंची उसकी , गिरफ्त मे तो जाना  वो कोई रौशनी  नही , वो तो आग थी\ जिसने बैखोफ  उडती हुई उस चिड़िया के पंख  को ही जला दिया| उसे पहुँचाना तो था  अपनी मंजिल तक  पर  रौशनी  की चा...