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कविता

  उसने अपनी पसंद से शादी की रंडी कहलायी  बाल कटवाये तो परकटी जो जीन्स पहन ली  तो रांड शब्द उपहार मिला उसने साड़ी पहनी जो दिखी नहीं  सूट, बिंदी, चूड़ी  नजरांदाज किये गये बस दिखा क्या  शादी, बाल, जीन्स  वह भी क्यों? अवहेलना जो करनी थी ऊंगली उठानी थी संस्कारों पर एक बात पता चली जहां औरतें मार खाती रहीं वह घर स्वर्ग कहलाया और जहां आवाज उठाती  उठ खड़ी हुई वहां देखा गया शादी, बाल, जीन्स  गाली जो देनी थी यह सुन वह रोई भी खूब  याद किया ईश्वर को न्याय भी मांगा फिर ईश्वर ने कहा  गाली को वरदान मानो अपनी ताकत बनाओ कमजोरी नहीं  सच बोलने वाले कमजोर नहीं होते सामने बोलना ताकत  बाकी पीठ पीछे वाले तो कायर ही कहलाये क्योंकि उनको नहीं दिखती  सच्चाई  उनको दिखता है शादी, बाल, जीन्स  जिससे मिल सके तुम्हें उपहार  रंडी, परकटी और रांड  कहलाने का - दीप्ति शर्मा