याद

जब ना रहे कोई पास ,
याद बनके आ जाउगी .
आंसुओ के मोतिओ को,
यूँ ही झलका जाउगी

मुझे किनारे ना मिले,
बह गए ये जिंदगी ,
जीवन के मझधार मे.
पर रोशन कर ज़हां,
तुम्हारा महका जाउगी.

जब ख़ामोशी मे याद कर,
आँखों से  आंसू बहाओगे,
बनके हवा यूँ पास आ ,
तुम्हे सहला जाउगी .

ना होंगी पास तुम्हारे,
पर याद आके तुम्हे,
दूर से ही रुला जाउंगी.

- दीप्ति 

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