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मैं ना समझ सकी

ये कैसा जीवन है, मैं ना समझ सकी |
हूँ अपनों के साथ से जिन्दा पर क्यों?
उनके रहते तन्हा हूँ ,मैं ना समझ सकी |

सब कुछ जान  रही पर खामोश हूँ ,
हैरान  हो दुनिया के रुख को  देख,
अपने ख्वाबो को भी, मैं ना समझ सकी |

उलझने ना थमती हैं ना रूकती  हैं ,
इन उलझनों के भंवर में फंसी,
उन अडचनों को भी मैं ना समझ सकी |

फिरती हूँ  अपनी आँखों मे आंसू लिए ,
दुनिया मे क्या कीमत है इन आंसुओ की
ये दुनिया मे रह मैं ना समझ सकी |
- दीप्ति शर्मा 

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मैं चीख रही ,
मेरा लहू धधक रहा
कहीं सड़क लाल तो
कहीं बदरंग हो रही
पर ना बिजली चमकी
ना बरसात हुई
ना आँधी आयी
आयी तो उदासी
बस नसीब में मेरे
सुन ख़ुदा !
तू बहरा हो गया क्या ?
-दीप्ति शर्मा
नीले आसमां को देखती
निगाहों की टकटकी,
आँखों से रिसते पानी को
सुबह की ओस से
रात का तारा बना देती  है ।
@दीप्ति शर्मा