हम तो यूँ जिया करते हैं

हम तो यूँ  जिया करते हैं
लहरों से लड़ा करते हैं
कश्तियाँ भी घबरा जाये
हम इस तरह सेलाबो में
साहिल से मिला करते हैं
हम तो यूँ जिया करते हैं |
हरपल  खुश रहकर
आकाश कि सोच रख
ऊचाई छुआ करते है
हम तो यूँ जिया करते है |
कदम अपने सम्भाल
रास्तो पे चला करते हैं
मंजिलो को पाने की हम
कोशिशे किया करते हैं
हम तो यूँ जिया करते हैं |
खुद को रुला अपनी हंसी
दुनिया को दे ख़ुशी से
अब मस्त रहा करते हैं
हम तो यूँ जिया करते हैं |
नदी से निकल सागर की
गहराई से मिला करते हैं
अब हम वक़्त के साथ
उम्मीद लिए चला करते हैं
हम तो यूँ  जिया  करते हैं |
-दीप्ति शर्मा 

Comments

Ankur said…
kastiya nahi kashtiya hoti hai...............
Ankur said…
and also harpaal nahi harpal.........
deepti sharma said…
mujhe hindi ke word se matlab h vo vo sahi h na
unko sahi karne ko hi likha h
Udan Tashtari said…
बहुत सुन्दर!!
Kailash Sharma said…
प्रेरक और सार्थक भाव लिए बहुत सुंदर अभिव्यक्ति..
Unknown said…
काफी मार्मिक कविता है, अच्छी लगी
Unknown said…
काफी मार्मिक कविता है अच्छी लगी

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