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हम तो यूँ जिया करते हैं

हम तो यूँ  जिया करते हैं
लहरों से लड़ा करते हैं
कश्तियाँ भी घबरा जाये
हम इस तरह सेलाबो में
साहिल से मिला करते हैं
हम तो यूँ जिया करते हैं |
हरपल  खुश रहकर
आकाश कि सोच रख
ऊचाई छुआ करते है
हम तो यूँ जिया करते है |
कदम अपने सम्भाल
रास्तो पे चला करते हैं
मंजिलो को पाने की हम
कोशिशे किया करते हैं
हम तो यूँ जिया करते हैं |
खुद को रुला अपनी हंसी
दुनिया को दे ख़ुशी से
अब मस्त रहा करते हैं
हम तो यूँ जिया करते हैं |
नदी से निकल सागर की
गहराई से मिला करते हैं
अब हम वक़्त के साथ
उम्मीद लिए चला करते हैं
हम तो यूँ  जिया  करते हैं |
-दीप्ति शर्मा 

Comments

Ankur said…
kastiya nahi kashtiya hoti hai...............
Ankur said…
and also harpaal nahi harpal.........
Deepti Sharma said…
mujhe hindi ke word se matlab h vo vo sahi h na
unko sahi karne ko hi likha h
Udan Tashtari said…
बहुत सुन्दर!!
प्रेरक और सार्थक भाव लिए बहुत सुंदर अभिव्यक्ति..
kaushal kumar said…
काफी मार्मिक कविता है, अच्छी लगी
kaushal kumar said…
काफी मार्मिक कविता है अच्छी लगी

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा