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उसने


जब झलक गये मेरे आँसू
जो दिखे नहीं महसूस हुए
पर देख लिया उसने इसको
पहचान लिया उसने मुझको
उस रिम-झिम सी फुआर में ।
उलझ गये जब ये केश मेरे
जो बिखर गये ना सुलझ सके
थाम लिया उसने उनको
सम्हाल लिया उसने मुझको
उस तूफ़ानी बयार में।
पलछिन में उसने छुपा लिया
मुझको आँखों में बसा लिया
क़ैद किया उसने मुझको
अपने गहरे ज़ज्बात में।
© दीप्ति शर्मा


Comments

Anonymous said…
waah beta
Chirag Joshi said…
उलझ गये जब ये केश मेरे
जो बिखर गये ना सुलझ सके
थाम लिया उसने उनको
सम्हाल लिया उसने मुझको
उस तूफ़ानी बयार में

bahut khoob yaar
ummdaa
यही सहारा होता है..
kshama said…
पलछिन में उसने छुपा लिया
मुझको आँखों में बसा लिया
क़ैद किया उसने मुझको
अपने गहरे ज़ज्बात में।
Behad sundar!
रचना की भावनाएँ अच्छी हैं.- विजय
deepti -bahut sundar bhavon ko prakat kiya hai aapne .badhai
Deepti Sharma said…
sukriya aap sabhi ka
ASHISH YADAV said…
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा