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तुम्हारी इजाजत


                   

मस्त अदाओ से सराबोर 
तुम्हारी जुल्फ चेहरे से हटाऊँ
क्या तुम्हारी ये इजाजत है 
ये सुहाने मौसम की नजाकत है |

जाहिल जमाना करे इंकार
पर पायलो की झंकार की
मोहब्बते दिल में इबादत है
ये सुहाने मौसम की नजाकत है |

इख़्तियार तेरा जो दिल में है
सोच उसे में लुत्फ़ उठाऊँ
क्या तुम्हारी ये इजाजत है
ये सुहाने मौसम की नजाकत है |

चुनरी में छुपे उस चाँद के
यहाँ आने की कुछ आहट है
सोच तुम्हे चारो दिशाओ में
मैं तुम्हारे ही गीत गाऊं
क्या तुम्हारी ये इजाजत है
ये सुहाने मौसम की नजाकत है |


- दीप्ति  शर्मा

Comments

Anonymous said…
ha hai na ijajat .
बहुत बढ़िया!

होली की शुभ कामनाएं.
muskan said…
आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!
rajveer said…
its too gud dear i like it so so so much
OM KASHYAP said…
क्या तुम्हारी ये इजाजत है
ये सुहाने मौसम की नजाकत है |
सुंदर अभिव्यक्ति
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाये
bahut sundar,


होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं , यह पर्व आपके जीवन में खुशियाँ और उमंग लेकर आये .............
कोमल भावों से सजी अच्छी रचना ...होली की शुभकामनायें
UNBEATABLE said…
ये उसकी इजाजत है .... और ... ये मौसम की नजाकत भी है .... सही समय पर बहुत सामायिक कविता ... होली की बहुत बहुत शुभकामनायें
सदा said…
बेहतरीन प्रस्‍तुति ।
Deepak Saini said…
कोमल भावो से सजी प्यारी कविता
कविता के साथ साथ चित्र भी सुन्दर है
होली की शुभकामनाये
दीप्ति जी
नमस्कार !
बहुत अच्छी ओर सुन्दर प्रस्तुति!
.....गहन भावों का संगम है यह अभिव्‍यक्ति
रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को|
कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..
दीप्ति,

जानकार अच्छा लगा की अब तुम ठीक हो......पोस्ट अच्छी लगी पोस्ट दुसरे पैरे में क्या कहना चाहती थी कुछ साफ़ नहीं था बाकी सब अच्छा लगा ....आपको और आपके परिवार को रंगों के त्यौहार की बधाई|
बहुत अच्छी कविता। होली की शुभकामनायें।
आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
बहुत सुंदर ....होली की शुभकामनायें
दीप्ति जी नमस्कार !
जानकर अच्छा लगा की आप अब ठीक हैं .....
बहुत अच्छी ओर सुन्दर प्रस्तुति!
आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!
kshama said…
Nihayat pyaree rachana!
Holee kee dheron shubhkamnayen!
H P SHARMA said…
itnaa achchhaa likha hai tumhe sab ijaajat hai.
amit-nivedita said…
behtarin ,bahut khoob...
अच्छे भाव की पंक्तियाँ - समय और मौसम के अनुसार। एक सलाह - हटाऊ - हटाऊँ, लुफ्त - लुत्फ, उठाऊ - उठाऊँ को ठीक कर लें। उम्मीद है बुरा नहीं मानियेगा।

गर मौसम की यही नजाकत
मिली आपको स्वयं इजाजत

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
अच्छे भाव की पंक्तियाँ - समय और मौसम के अनुसार। एक सलाह - हटाऊ - हटाऊँ, लुफ्त - लुत्फ, उठाऊ - उठाऊँ को ठीक कर लें। उम्मीद है बुरा नहीं मानियेगा।

गर मौसम की यही नजाकत
मिली आपको स्वयं इजाजत

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
आदरणीय दीप्ति जी
नमस्कार !
आपने बहुत सूक्ष्मता से भावों का चित्रण किया है ...कितनी सजगता से अपनी बात कहने का प्रयास किया है ...आपका आभार इस सार्थक रचना के लिए
आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनायें
devanshukashyap said…
अति सुन्दर
ये जिस मौसम की नजाकत है उसे फागुन कहते हैं ।

सुरक्षित , शांतिपूर्ण और प्यार तथा उमंग में डूबी हुई होली की सतरंगी शुभकामनायें ।
अहसासो की नज़ाकत को सुन्दर शब्द दिये हैं……………आपको और आपके पूरे परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
Kunwar Kusumesh said…
होली में नज़ाकत तो दिखाएंगी ही मोहतरमा.
किसी का एक बड़ा मौज़ू शेर है:-
अदा से, नाज से, अंदाज से, चिलमन से निकलेंगे.
वो हमको क़त्ल करने के लिए हर फ़न से निकलेंगे..
सुहाने मौसम की नजाक

होली पर बन जाती है आफत
इसे राहत बनने दो
ठंडा पानी बरसने दो
रंगे गुलाल सिर्फ लगाऊं
होली पर हंसूं और
सदा खिलखिलाऊं
होली पर गुजिया खाऊं
खिलाऊं, ऊधम नहीं
सिर्फ धमाल मचाऊं
अपनी तो ऐसी आदत है
Shah Nawaz said…
बहुत ही खूबसूरती के साथ लिखा है... बेहतरीन!!!


आपको परिवार सहित होली की बहुत-बहुत मुबारकबाद... हार्दिक शुभकामनाएँ!
Ramesh said…
This comment has been removed by a blog administrator.
Ravi Rajbhar said…
wah kya bat hai....
jhankar ki tarah dil ko chhu gai.

badhai.
Ravi Rajbhar said…
Maf kijiye mai bahut der se yaha aaya.

abhi aapki tabiyat kaisi hai....pichhali post par aapne likha hai.

aapke sukhmay swasth ki subhkamnaye.
बहुत अच्छी ओर सुन्दर प्रस्तुति! धन्यवाद|
नजाकत के साथ लिखी गई कविता, बधाई।
Anonymous said…
nice
mastttttt.........

nazaakat bhari rachnaa padhkar dil baag baag ho gaya..specially pehla para pdhkar....
Shkehar Kumawat said…
बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

bahut khub
amrendra "amar" said…
बहुत बढ़िया!

होली की शुभ कामनाएं
Sunil Kumar said…
बहुत बढ़िया!

होली की शुभ कामनाएं.
दीप said…
sundar bahut sundar
सुन्दर रचना
आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
माफियाओं के चंगुल में ब्लागिंग
DR. ANWER JAMAL said…
बिल्कुल इजाज़त है और भरपूर इजाज़त है।
इसे कहते हैं नेकी और पूछ पूछ ।

http://siratalmustaqueem.blogspot.com/2010/09/blog-post_15.html

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा