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ये कैसी जिन्दगी

मेरी तबियत बहुत दिन से ख़राब है, दिन पर दिन बिगड़ ही रही है कोई सुधर नही लग रहा है,
रो रही थी अपनों को देख कर , की कहीं इनसे दूर न हो जाऊ और .....
           
कभी जिन्दगी यूँ 
करवट लेती है 
कि लगता है 
मेरी जिन्दगी साथ 
छोड़ मेरा मुझसे 
दूर जा रही है |

होंठो पर हंसी रख 
नकार दूँ  हर दर्द 
कभी कोई विपदा 
या अनहोनी घटा 
मेरी जिन्दगी साथ 
छोड़ मेरा मुझसे 
दूर जा रही है |

ये जुदा हो रही मुझसे 
या मैं जुदा हूँ इससे 
नहीं हम एक ही हैं 
तभी तो आज ,
ये मुझे अपने 
साथ ले जा रही है 
अपनों से दूर कर 
हाथ पकड़ मेरा 
खुदा से मिलने जा रही है 
मेरी जिन्दगी साथ 
छोड़ मेरा मुझसे 
दूर जा रही है |

कमजोर कर दिया 
जो आसन हो ले जाना 
मुझसे सबसे दूर 
अब समझ आया ,
शायद अलविदा कहना 
पड़ेगा मुझे अब सबसे 
क्यों कि मेरी ये 
जिन्दगी मुझे छोड़ नही 
साथ ले दुनिया छोड़
दूर जा रही है 
मेरी जिन्दगी मेरे 
साथ जा रही है |
- दीप्ति शर्मा
                                

                         


Comments

Anonymous said…
ye kya hai
tu thik ho jayegi
samjh aaya na
Shekhar Kumawat said…
aap ke achhe swasth ki shubhy kamnayen
निश्चिन्त रहिये आप जल्दी ही ठीक हो जायेंगी.नेगेटिव न सोचिये.

शुभकामनाओं के साथ!
Sunil Kumar said…
हम तो यही कहेंगे कि दिल तो दे एस मिजाज का परवरदिगार दे
जो रंज की घडी भी ख़ुशी से गुजार दे...
आप जैसी बहादुर लड़की दिल की इतनी कमजोर!
निश्चिन्त रहिये आप जल्दी ही ठीक हो जायेंगी.
ईश्वर पे विश्वास रखिये दिल को मजबूत बनाइये.
हमारी शुभकामनाये आपके साथ है!!
मन में संबल बनाये रखें, आप ठीक हो जायेंगी।
Deepak Saini said…
nar ho na nirash karo maan ko
ye panktiya achanak yaad aa gayi

jaldi tkeek ho jao aur jaldi se ek pyari si kavita post karo

shubhkamnaye
दीप्ति ऐसा बिल्कुल ना सोचें .... आप जल्द स्वस्थ हो जाएँगी..... रचना के संवेदनशील विचार मन को छू रहे हैं... कृपया अपना ख्याल रखें ....
kshama said…
Nahi,nahi...ye mahaz kamzori ke karan manme aaye ,kuchh bhatke hue se khayal hain! Zidagee aapkaa poora saath degee yahee dilee kaamna hai!
Udan Tashtari said…
शीघ्र स्वास्थय लाभ के लिए शुभकामनाएँ...
शीघ्र स्वास्थय लाभ के लिए शुभकामनाएँ

sundar rachna
VIJUY RONJAN said…
Kya hua aapko deepti ji...Shayad aapki manahsthiti aur sharrerik vyaadhi ko jan ne ko mujhe aapke pichle pannon ko palatne ki izaazat chahiye.Par itna zarur kahunga ki Ishwar aapko swasth rakkhega aur hamein aapki lekhni ka ananad milta rahega.

GET WELL SOON DEEPTI.
I prey for your speedy recovery.
very touching poem.congrats.
शीघ्र स्वस्थ हों ...शुभकामनायें हैं ...ऐसे समय में भावों का सम्प्रेषण खूबसूरती से लिखा है ...
दीप्ति...,

ये कैसी बातें करती हो.....खुदा महफूज़ रखे तुम्हे हर बला से......उस रहीम से दुआ करता हूँ की वो तुम्हे तमाम दुश्वारियों से निजात दे.....बीमारी से शिफा अता फरमाए.....आमीन...

हौसला रखो.....सब ठीक हो जायेगा......खुदा ने चाहा तो बहुत जल्द तुम ठीक हो जाओगी......अपना ख्याल रखना.....
चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 15 -03 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/
Kunwar Kusumesh said…
What happened ,Deepti ? There appears to be something wrong with you.Be brave in difficult situations. You can share your problem clearly and seek my advice.
सदा said…
शुभकामनाएं आपके लिये ....।
Manpreet Kaur said…
बहुत ही सुंदर रचना है दिल को अच्छी लगे ! देर से कमेन्ट किया सॉरी !हवे अ गुड डे !
मेरे ब्लॉग पर आए !
Music Bol
Lyrics Mantra
Shayari Dil Se
दुआओं में भी दम है
ना दवा से कम है
जिंदगी आपकी मुस्करा रही
यह खामखा गम है.

इश्वर आपको स्वास्थ्य एवं साहस दें और आप सकारात्मक ऊर्जा से ओत -प्रोत रहें.
ओह शब्दों ने तो सिहरा दिया , निसंदेह आपका अनुभव अभी बहुत कठिन और दुरूह है लेकिन यकीन मानिए ये ज्यादा दिनों तक नहीं रहता । अरे मन को झटकिए जोर से और उसे एक जोर की चूंटी काटिए थोडा जगाईए । किताबें पढिए ऐसी कि आप तो आप ...आप के साथ आपकी पूरी जिंदगी ही हुलस पडेगी । अगली पोस्ट ऐसी हो कि कि रंग और खुशबू से सब सराबोर हो जाएं । मुझे यकीन है इ ऐसा ही होगा और हां किताबें कौन सी पढनी हैं ....दुविधा हो तो ..गुनाहों का देवता पढ डालिएगा ..अब अगली पोस्ट पर मिलूंगा । शुभकामनाएं ..और जल्दी अच्छी हो जाएं ..ये नहीं कहूंगा क्योंकि मुझे यकीन है कि ऐसा जल्दी से भी जल्दी होगा
शीघ्र स्वास्थय लाभ के लिए शुभकामनाएँ
कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।
सुन्दर भाव की पंक्तियाँ दीप्ती जी।

कभी जिन्दगी ने मचलना सिखाया
लगी ठोकरें तो सम्भलना सिखाया

सम्भलकर के जीना कठिन जिन्दगी में
उलझ भी गये तो निकलना सिखाया

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
amrendra "amar" said…
आप ठीक हो जायेंगी
शुभकामनाएं आपके लिये ....
mahendra varma said…
हमने ठूंठ पर पत्तों को लगते देखा है ,
झुण्ड के झुण्ड बादलों को बरसते देखा है ,
दुखों की जंजीरें बहुत मजबूत नज़र आती हैं ,
मगर ख़ुशी के एक झोंके से उन्हें बिखरते देखा
Chartered Vyas said…
लाजवाब .........अंतर्मन तक छू लिया ! मन के भावों को शब्दों में अभिव्यक्त करना एक कला है और ईश्वर ने आपको इस गुण से युक्त किया है |

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा