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कैसी इंसानियत

आज सुबह ही वो माँ का आशीर्वाद ले काम पर निकला , कितना खुश था अपनी धुन में मस्त , रोज कि तरह वो काम पर पहुँच गया | वहां पहुंचकर उसे पता चला कि आज उसे बहुत जरुरी काम करना है | कुछ रुपये है वो बैंक मै जमा करने हैं, करीब १२ लाख रुपये हैं|
इतनी बड़ी जिम्मेदारी समझ , और मालिक का हुकुम भी तो है तो करना तो है ही| तो उसने bike ली और अपने एक साथी के साथ चल दिया |
पर कुछ कदम दूरी पर ही कुछ लोगो ने उसे रोका और उसकी आँख मे लाल मिर्ची पावडर डाल दिया और रुपयों का बैग छिनने लगे उसने नही दिया, देता भी कैसे किसी और कि अमानत जो थी उन लोगो ने उसे गोली मार दी और बैग लेके भाग गये |वो वही  तडपता रहा और लोगो ने उसे अस्पताल तक ले जाने कि गनीमत नही कि और तो और अपने खिड़की दरवाजे भी लगा लिए और आँखे बंद कर बैठ गये | और उसने तडपते हुए वहीँ दम तोड़ दिया|
आखिर क्यों लोग सब जानते हुए भी गलत लोगो का साथ देते हैं उनका विरोध नही करते | हमलावर कुछ ही लोग थे अगर सारे लोग डरे बिना , मिलकर उन्हें पकड़ते | वो कुछ रहम दिखा देते तो शायद  वो पकडे जाते और उसकी जान बच जाती , उस माँ कि कोख सुनी नही होती |
क्या ये ही इंसानियत है जो किसी के काम नही आती और सह लेती है हर बुराई?

Comments

आज इंसानियत बची कहाँ है?
UNBEATABLE said…
Deepti tumne sahi chitran kiya hai aur ek vicharotejak Prashan kiya hai ... Badhayee .... lekin mei Vandana G se sehmat nahi hoon ... Insaniyat aaj bhi Zinda hai .... Tabhi to Jaipur mei Serial Bomb blast hone par Saare Jaipur waasiyo ne Hospitals ko apne Rakt daan se labalab kar diya jis'se kisi bhi pidiit ko rakt ki kami nahi ho .... aur na jaane aise kitne hi udahran mil jaayenge jisme aaj bhi aapko insaniyat Jinda deekh jaayegi
mr. Ajit said…
this is a real story from Agra ..insaniyat to h logon me par jan sabhi ko pyari hoti h....ye sab tabhi band hoga sakta h jab criminals ko saja milna shuru ho jayega kori insaniyat se kuch nhi hoga....be practical..and try to realize d situation being at that very place.
i hate our judicial system .........jo hamesha se andha hai prajatantra ke naam par.somewhat dictatorship is needed in india .
JAI HIND!!!
Deepti Sharma said…
vandana ji aapka mere blog par aane ko dhanyvad
yese hi aate rahiye
or mera margdarsan karte rahiye
dhanyvad
"क्या ये ही इंसानियत है जो किसी के काम नही आती और सह लेती है हर बुराई?"
शायद सही क्योंकि हमारी कथनी और करनी अलग अलग हैं.
Deepti Sharma said…
राकेश कौशिक ji apko mere blog par aane ko dhanyvad
yese hi mera margdarsan karte rahiye
dhanyvad
Deepti Sharma said…
UNBEATABLE ji apko dhanyvad
isi tarah mera hosla badate rahiya
dhanyvad
Ankur said…
aankhon me aanso aa gayeee.
Poorviya said…
samaj ki tadaf aaj yahi hai log dam tod dete hai .
woh muskara kar chal dete hai.
Anonymous said…
This comment has been removed by a blog administrator.
Anonymous said…
i am ramesh chandra sraswat

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा