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मच्छर

एक पुरानी रचना

मच्छर

वो गुनगुनाना तुम्हारा
मेरे कानों के आस पास
और मेरा तुम्हें महसूस करना
कभी दिन तो कभी साँझ
हर पहर तुम्हारी आवाज़ जो
गूँजती रहती कानों में
जो सोने तक नहीं देती
गहरी नींद से भी जगा देती
सुना मुझे नित नये गीत
प्रमाद से भर जाते थे तुम
जाने के बाद भी अपना
अहसास छोड़ जाते थे तुम
पर अब ना कोई राग सुनाते हो
तुम मेरे सिरहाने
चुपचाप चले आते हो
तुम ठीक तो हो ना?
कुछ बदले नजर आते हो
मैं नहीं समझ पाती आहट
तुम्हारे आने की
पता तो तब चलता है
जब डंक मारते तुम
रंगे हाथों पकड़े जाते हो
उफ़...
कितने सारे लाल निशान
और उनको खुजलाने का
तोहफ़ा मुफ्त भेंट दे जाते हो
ओ मच्छर सुनो ना...
तुम ये चालाकी मुझे क्यों दिखाते हो
पहले तो अहसास कराते थे
अब बिन कोई राग सुनाए
मुफ्त में काट जाते हो

© दीप्ति शर्मा


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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा