दीवार पर टँगे
कैनवास के रंगों को
धूल की परतें
हल्का कर देती हैं
पर जिंदगी के कैनवास
पर चढ़े रंग
अनुभव की परतों से
दिन प्रति दिन
गहरे होते जाते हैं ।

- deepti sharma

Comments

kshama said…
Aisabhi hota hai....kabhi ultabhi hota hai....yadon parbhi dhoolkee parat chadh jati hai!
sushmaa kumarri said…
भावों से नाजुक शब्‍द......
बहुत अच्छी रचना, बहुत सुंदर

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