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नववर्ष में आओ हाथ मिलाये
साथ मिलकर चल पड़े
नव उमंग की चाह में
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।

सूरज की रौशनी सा
प्रेम भाव ले चले
कदम से कदम मिला
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।

आपस का बैर भूलकर
नये गीत गढ़ चले
सफलताऐं साथ लेकर
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।

उम्मीदों की किरण जला
मुस्कुराती धूप ले चले
सुख समृद्धि साथ ले
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।

जो गया साल पुराना
उसके अनुभव दे चले
नया कुछ पाने की चाह में
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।
© दीप्ति शर्मा


Comments

madhu singh said…
sundar rachnaउम्मीदों की किरण जला
मुस्कुराती धूप ले चले
सुख समृद्धि साथ ले
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।

जो गया साल पुराना
उसके अनुभव दे चले
नया कुछ पाने की चाह में
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!

दिनांक 3/1/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
धन्यवाद!

कोई जगाए,कोई झकझोरे,कोई कहे
उठ,नए विश्वास से बंजर धारा से खुद को जोड़



नयी उम्मीदों के साथ नववर्ष की शुभकामनाएँ
बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
नब बर्ष (2013) की हार्दिक शुभकामना.

मंगलमय हो आपको नब बर्ष का त्यौहार
जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
इश्वर की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार.


Kailash Sharma said…
बहुत सुन्दर भाव..नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!


♥(¯`'•.¸(¯`•*♥♥*•¯)¸.•'´¯)♥
♥♥नव वर्ष मंगलमय हो !♥♥
♥(_¸.•'´(_•*♥♥*•_)`'• .¸_)♥




आपस का बैर भूलकर
नये गीत गढ़ चले
सफलताऐं साथ लेकर
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।

उम्मीदों की किरण जला
मुस्कुराती धूप ले चले
सुख समृद्धि साथ ले
हम बढ़ चले हम चल पड़े ।

बहुत सुंदर !
दीप्ति जी
सुंदर , सार्थक रचना के लिए बधाई !

नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित…
राजेन्द्र स्वर्णकार
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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !