कब




कैद हैं कुछ 
यादों के भंवर 
जो सुलगते हैं 
पर पिघलेगे कब ?
- दीप्ति शर्मा 

Comments

Anonymous said…
honge jarur honge!!!
समय आने पर वह ज्वार पिघलेगा।
वाह ..
आपको दीपावली की शुभकामनाएं !!
बहुत सुन्दर प्रस्तुति |

दीवाली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|
उम्‍मीद पर दुनिया कायम है...

सुंदर प्रस्‍तुति।
आपको और आपके परिवार को दीप पर्व की शुभकामनाएं......
वाह!

आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

सादर
दीवाली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|
Amrita Tanmay said…
.**शुभ दीपावली **
हर चीज़ अपने समय पर होती है ..
दीपावली की मंगल कामनाएं ..
Anonymous said…
सर्दी के इस ख़ुश्क मौसम में सुलगती हुई एक लघु आकार की साकार कोशिश....शुभकामनायें......
तुम्हारा यह प्रिय स्पर्श जो छूने के बाद छुटता नहीं__इन भावनाओं के भंवर को रुकने मत दो__सुलगने दो__स्नेही तुम समझो__इससे सुलगने से ही तुम्हारी संचेतना और बढती जायेगी और अंधों को प्रकाश |

Popular posts from this blog

मेरी परछाई

खता नहीं है |

झरना