तेरे लाज के घूँघट से

                                            

उमड़ आयी बदली 
तेरे लाज के घूँघट से 
द्वार पर  खड़ी तू 
बेतस बाट जोहती 
झलक गये तेरे केशू
तेरे आँखों के अर्पण से |

पनघट पे तेरा आना 
भेष बदल गगरी छलकाना 
छलक गयी गगरी तेरी 
तेरे लाज के घूँघट से |

सजीले पंख सजाना 
प्रतिध्वनित  वेग से 
झरकर गिर आयी 
तेरे पाजेब की रुनझुन से |

रागों को त्याग 
निष्प्राण तन में उज्जवल 
उस अनछुई छुअन में 
बरस गयी बदली 
तेरे लाज के घूँघट से 
उमड़ आयी बदली 
तेरे लाज के घूँघट से 
- दीप्ति शर्मा 

                                                   


Comments

Anonymous said…
good mam
babanpandey said…
सार गर्भित
yashoda Agrawal said…
शुक्रिया एक और अच्छी प्रस्तुति के लिये
सागर said…
उमड़ आयी बदली
तेरे लाज के घूँघट से
द्वार पर खड़ी तू
बेतस बाट जोहती
झलक गये तेरे केशू
तेरे आँखों के अर्पण से |bhaut hi khubsurat....
Deepak Saini said…
बहुत सुन्दर कविता
Pradeep said…
दीप्ती जी नमस्ते !
लज्जा के आभूषण का शानदार चित्रण किया है आपने...बहुत खूब ...
घूंघट का सौन्दर्य अनुपम है।
sushmaa kumarri said…
बहुत ही खुबसूरत.....
vandan gupta said…
vaah bahut sundar bhaavavaytki......yahan bhi dekhein.......http://vandana-zindagi.blogspot.com
बहुत सुन्दर कविता| धन्यवाद्|
रेखा said…
खुबसूरत अभिव्यक्ति ...
बेहतरीन प्रस्‍तुतिकरण.....
शुभकामनाएं एवं आभार....
पहली बार आया आपके ब्‍लाग पर लेकिन ऐसा लगा कि हमेशा आना पडेगा... सो फालोवर्स की सूची में शामिल हो गया.....
Anonymous said…
बहुत ही बढ़िया
युवा पहल
Dr Varsha Singh said…
बेहद उत्कृष्ट रचना है यह. आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें
kshama said…
Bahut pyaree rachana!
बहुत सुन्दर है मैंने इसको फेसबुक में पढ़ा था और शायद कैच माय पोस्ट में भी हैं ना
shikha varshney said…
सुन्दर अतिसुन्दर.
Kunwar Kusumesh said…
बहुत सुन्दर.
Asha Joglekar said…
लाज का शरमीला अहसास ।
Unknown said…
अति उत्तम।
दीप्ति जी आप बहुत सुन्दर लिखती हैं । अपनी कविताओं में आपने जीवह के सभी पहलुओं को छूने का प्रयास करके दिखा दिया है कि लेखन कला में आप काफी निखरी हुई हैं। मु। लगता है निराशा व अवसाद कहीं अन्दर ही अन्दर आपकी इस निपुणता को छू गया है । अन्तर्मन को कमजोर न पड़ने दें । एक अच्छी लेखिका होने पर आपको बधाई ।

--आदित्य बी0एस0
Unknown said…
REALLY VERY VERY GOOD

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