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नदी


 
                                                    
कलकल करती सब कुछ सहती,
कभी किसी से कुछ ना कहती ,
अनजानी राहों में मुड़ती बहती ,
चलती रहती नदियाँ की धार|


लटरें भवरें सब हैं सुनते ,
साथ में चलती मंद बयार ,
कौतूहल में सागर से मिलती पर ,
चलती रहती नदियाँ की धार |


जुदा हो गयी हिम से देखो ,
तट से लिपट बहा है करती,
सुनकर वो मस्त बहार,


फूल पत्तियाँ जलज औ पाथर,
पथ में आए बार बार ,
अपने मन से हँसती गाती,
चलती रहती नदियाँ की धार | 
 

दीप्ति शर्मा

Comments

Anonymous said…
nadiya ki dhar
bahut sunder
नदी को बहुत सुंदर भावो से व्यक्त किया आपने ...
sundar panktiyon se saji hui bahut sundar rachna
नदी की धार सी बहती कविता।
अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई तथा शुभकामनाएं !
जी हाँ ! जीवन चलने का नाम
चलते रहो सुबह शाम .......
की कुहरा छट जाएगा मित्रा
की रास्ता कट जाएगा मित्रा
कृपया मेरे ब्लॉग पर भी तो आयें
http://madanaryancom.blogspot.com/
गुरु पूर्णिमा के पवन पर्व पर हार्दिक मंगलकामनाये !!
बहुत ही उम्दा प्रस्तुती
कम शब्दों में अधिक बयां करना आपकी विशेषता है. और यही आपकी कविता की खूबी. प्रकृति के उपादान आपके लिए भावभूमि का काम करते हैं. नदी पर यह एक बहुत सुन्दर कविता है. आभार Deepti ji.
अनेकानेक शुभकामनायें.
कम शब्दों में अधिक बयां करना आपकी विशेषता है. और यही आपकी कविता की खूबी. प्रकृति के उपादान आपके लिए भावभूमि का काम करते हैं. नदी पर यह एक बहुत सुन्दर कविता है. आभार.
अनेकानेक शुभकामनायें.
Deepak Saini said…
सुन्दर रचना
बहुत सुन्दर लगी कविता.......शानदार|
वाह !जी,
इस कविता का तो जवाब नहीं !
नदी को सुंदर भावो से व्यक्त किया आपने
निश्छल नदिया की धार की ही तरह पवित्र शब्द सरिता का अनहद नाद और अनवरत प्रवाह बड़ा मनमोहक और अप्रतिम है.. बहुत अच्छा लिखा है आपने दीप्ति जी.. हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार कीजियेगा.. शेष शुभम !
kumar said…
bahut hi sundar bhav hai........badhai....
रेखा said…
अनवरत बहती हुई नदी के विभिन्न रूपों का बेहतरीन वर्णन .........
Rakesh Kumar said…
अपने मन से हँसती गाँती,
चलती रहती नदियाँ की धार

सुन्दर मस्त कविता में
भाव मानो नदिया की धार की
तरह बह रहे हैं.
शब्द कल कल छल छल
करके गुंजायमान हो रहे हैं.

अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार.

मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.
vidhya said…
नदी की धार सी बहती कविता
\लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।
--
hai
DHEERAJ said…
बहुत अच्छा लिखा है आपने। मुझे ऐसा लिखना तो नहीं आता पर पढ़ने का शौक बहुत है। ये लिखने का जो हुनर है ये भगवान का दिया हुआ वरदान है ऐसा मेरा मानना है, तो लिखते रहिए।
दीप्ति जी बहुत ही सुन्दर कविता बधाई और शुभकामनायें |
दीप्ति जी मूल भाव सुन्दर -शब्द बांध अच्छे -ये जिन्दगी भी ऐसी ही है -
फूल पत्तियां जलज औ पाथर
पथ में आये बार बार
शुक्ल भ्रमर ५
भ्रमर का दर्द और दर्पण
ana said…
bahut achchha likha hai aapne....bilkul nadi ki tarah sahaj bhasha pravah....badhiya
सुधीर said…
अच्छी प्रस्तुति
chirag said…
Bahut khoob
nice poem
really beautiful
nice blog yaar
i vl follow it
check out mine also
http://iamhereonlyforu.blogspot.com/
Bhargav said…
as per my perception.... yahaan... NADIYA means AUTHOR... then read again, one would know the insight..

awesome work... deeptiji

www.soul-n-heart.blogspot.com
Amrita Tanmay said…
बहुत अच्छा लिखा है .हाँ! शुभकामनायें
Bahut Sundar.
TRILOK SINGH THAKURELA
triloksinghthakurela.blogspot.com
नदी को शब्दों की सुन्दर अभिव्यक्ति दी है आपने.
नदिया चले चले रे धारा
already itne comments mil chuke hain achchhe achchhe. main aur kya kahoo..
very nice poem..
Udan Tashtari said…
हम तो फेसबुक से आज वाली खोजने आये थे. :)

यह भी बहुत बढ़िया.
बेहतरीन प्रस्तुति .... सुन्दर मनमोहक रचना है ...
Deepak Saini said…
सुन्दर रचना
बधाई
नदिया के स्वभाव को समझ पाना और उस के साथ बहना नारी की विशिष्टता को स्थापित करता है....शुभकामनाएं...!
भावपूर्ण अभिव्यक्ति........ बहुत बहुत बधाई...
amrendra "amar" said…
सुंदर भावो से व्यक्त किया आपने
बधाई...
सुन्दर अभिव्यक्ति... मनमोहक रचना...

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !