मुस्कुरा रही हूँ मैं तभी तुम कहते हो हँस रहा हूँ मैं भी पर ! तुम्हारे हँसने और मेरे मुस्कुराने में बहुत अंतर है, एक स्त्री का मुस्कुराना तुम समझ नहीं सकते। #मन की बात करती दीप...
कल खाना बनाते हाथ जला तो यूँ ही कुछ लिखा हाथ का जलना क्रिया हुयी या प्रतिक्रिया ! सोच रही हूँ कढाही में सब्जी पक रही गरम माहौल है पूरी सेंकने की तैयारी आटा गूँथ लिया, लोई मसल ब...
पर्वत पिघल रहे हैं घास,फूल, पत्तीयाँ बहकर जमा हो गयीं हैं एक जगह हाँ रेगिस्तान जम गया है मेरे पीछे ऊँट काँप रहा है बहुत से पक्षी आकर दुबक गये हैं हुआ क्या ये अचानक सब बदल रहा प...
रेल में खिडकी पर बैठी मैं आसमान ताक रही हूँ अलग ही छवियाँ दिख रही हैं हर बार और उनको समझने की कोशिश मैं हर बार करती कुछ जोड़ती, कुछ मिटाती अनवरत ताक रही हूँ आसमान के वर्तमान को ...
यादों की नदी,बातों का झरना सदियों से साथ बहते,झरते पर अब झरना सूख गया, नदी का वेग तीव्र हो गया, जिसमें कश्तियाँ भी डूब जाती हैं। (बस यूँ ही ,जिंदगी सच) # हिन्दी_ब्लॉगिंग