दहलीज जो पार की,
मुड़कर नहीं देखा पीछे
पर दहलीज ताकती रही
अपनों को तलाशती रही
कि कोई आएगा अपना लौटकर
इस पार
#दहलीज का दर्द
#बसयूँही
#दीप्तिशर्मा

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