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तुम आओगे ना ??

अहसासों के दरमियां
मेरे ख़्वाबों को जगाने
जब तुम आओगे ना
कुछ शरामऊँगी  मैं
धडकनों को थामकर
कुछ बहक सा जाऊँगी मैं
मुझे बहकाने तुम आओगे ना ????

इठलाती सी धूप में
रूख पर नक़ाब गिराने
जब तुम आओगे ना
तेज़ किरणें शरमा जायेंगी
तुम्हारे अक्स के आ जाने से
मेरी परछाई को ख़ुद में
समाने तुम आओगे ना ????

अकेलेपन में भींगी आँखों
के आंसूओं को पोंछने 
जब तुम आओगे ना
एक मुस्कान खिल जायेगी
कुछ किस्से सुनने
भटकती इस ज़िंदगी में
मुझे अपना बनाने
आरजुओं को जगाने तुम आओगे ना ????

दो नहीं एक ही है हम
इस हौसले को बढ़ाने
जब तुम आओगे ना
चाँद की चाँदनी तेज़ हो
अपना तेज़ फैलायेगी
उसकी रौशनी मुझ तक
आकर तेरा अहसास करायेगी
अहसास कराने अपना तुम आओगे ना ????
कह दो एक बार
तुम आओगे ना ????
तुम आओगे !!!!!
दीप्ति शर्मा 

Comments

खूबसूरत अहसास
Dr Varsha Singh said…
बेहतरीन रचना ....
kshama said…
Kitni khoobsoorat rachana hai ye!
Ashutosh pandey said…
इतनी चाहत से बुलाये कोइ, भगवान भी जमीं पर उतर आये
इंसान भी जो फरिश्ता होगा ,दौड़ कर के गले समा जाए
Ashutosh pandey said…
कोई इतनी चाहत से उसे बुलाये, भगवान भी जमीं पर उतर आये !
इंसान गर वो फरिश्ता होगा , दौडकर आयेगा और गले समा जाए !!
आपने अहसासों को अच्छी तरह प्रस्तुत किया है। मेरे नवीनतम पोस्ट पर आपका हार्दिक अभिनंदन है।
बहुत सुंदर अहसास । मेरे नवीनतम पोस्ट पर आपका हार्दिक अभिनंदन है।र
गहरे एहसास में लिपटे शब्द ...
kshama said…
उसकी रौशनी मुझ तक
आकर तेरा अहसास करायेगी
अहसास कराने अपना तुम आओगे ना ????
कह दो एक बार
तुम आओगे ना ????
तुम आओगे !!!!!
yahee kasak,yahee tadap hoti hai jab koyi pyar karta hai....

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा