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लिख रहीं हूँ एक ग़ज़ल मैं

लिख रहीं हूँ एक ग़ज़ल मैं ,
आवाज दे अपनी सामने लाऊँगी
तैयार कर धुन उसकी 
सबको वो ग़ज़ल सुनाऊंगी
अभी तो लिख रही हूँ फिर
बाद परीक्षा के सुना पाऊँगी
लिख रहीं हूँ एक ग़ज़ल मैं 
आवाज़ दे अपनी सामने लाऊँगी 
कुछ महकी बात सुनाऊंगी
कुछ हँसाती सी कुछ रुलाती सी
वो ग़ज़ल जल्द ही ले आऊँगी
थोडा इंतज़ार कर लीजिये
फिर तो इसकी धुन मैं
आपके कानों तक पहुंचाऊँगी
बस मैं गुनगुनाती जाऊँगी
लिख रहीं हूँ एक ग़ज़ल मैं
आवाज़ दे अपनी सामने लाऊँगी

तो मिलते हैं परीक्षा के बाद !!!!!!!!
- दीप्ति शर्मा

Comments

Anonymous said…
hum intezar karege
kshama said…
Bahut sundar geet ban pada hai!
कोमल भावो की बेहतरीन अभिवयक्ति.....
Anonymous said…
best of luck, kewl isi priksha mein nhi aap zindgi ki hr priksha mein paas ho
सागर said…
bhaut hi khubsurat gazal....likhi aapne....
इंतजार.... इंतजार... इंतजार....
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!चर्चा मंच में शामिल होकर चर्चा को समृद्ध बनाएं....
.


लिख रही हूं एक ग़ज़ल मैं …
तैयार कर धुन उसकी सबको सुनाऊंगी …

सच ? मुझे बहुत शौक है …

दीप्ति जी याद रखिएगा … हम इंतज़ार करते रहेंगे आपकी ग़ज़ल सुनने के लिए …

अभी तो तसल्ली से परीक्षा दीजिए … आपको सफलता मिले , यही शुभकामना है ! :)

मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार
बहुत सुंदर
क्या कहने
yashoda4 said…
बहुत सुन्दर......एक बेहतरीन सोच
इसे मैं अपनी धरोहर बनाना चाहती हूं
अनुमति प्रदान करें
सादर
यशोदा
Reena Maurya said…
ati sundar rachana hai...
बहुत खूब्।
रेखा said…
बेहतरीन गजल ...
बहुत खूब!
आपका "स्पर्श " वास्तव में दिल को छू लेने वाला है सभी को पढना चाहिए !
anjana said…
सुन्दर प्रस्तुति...
दोस्तों, एक छोटी सी खुशखबरी है ....... अपनी पत्रिका 'स्काई लैब' में एक नए स्तंभ के प्रकाशन का प्रस्ताव है जिसका नाम है 'दस्तक' | इस स्तंभ की खास बात यह है कि इसमें युवा तथा नये लेखकों की रचनाएँ शामिल की जायेगीं, तो वे सभी मित्र जिनकी उम्र 18 से 35 के बीच में है अपनी रचनाएं हमें skylab.naighazal@gmail.com पर भेज सकते है, साथ ही साथ अपना परिचये तथा फोटो जरुर भेजे | यदि और अधिक जानकारी चाहिये तो आप मुझे फोन कर सकते है नंबर हैं 09716562057, 09907675125. तो दोस्तों आप तैयार है न .......
jaydevbarua said…
बहुत अच्छे |

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा