Monday 19 September 2011

समझो गर तुम

                                               
शिकायत नहीं है वफ़ा से तुम्हारी 
फिर भी तन्हाइयों के पास हूँ |

उलझी हूँ अपनी ही कुछ बातों से 
फिर भी तो जिन्दगी की मैं आस हूँ |

क्यूँ ढूंढते हो मुझमें वो खुशियाँ 
मैं तो अपने जीवन से निराश हूँ |

कोई अनजाना डर तो है दिल में
वजह से उसकी ही मैं उदास  हूँ |

ज़िन्दगी जो अनजान है मुझसे 
रंजों से ज़िन्दगी की मैं हताश हूँ |
- दीप्ति शर्मा 

19 comments:

Anonymous said...

ab ye uljhane khatam kar dijiye!!!!

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत रचना....

Ehsaas said...

khyaal bahuta chhe hai...achhi rachna...
haan pehla sher apne aap me mukammal kaafiya tay nahi karta ye ek kami lagi muhe...

Mere latest post ko yahan padhe:
http://teri-galatfahmi.blogspot.com/2011/09/blog-post_19.html

प्रवीण पाण्डेय said...

इस अंधकूप से बाहर आयें।

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

Bahut achchhi bhavpurn rachna

आपके ब्लॉग की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर

ब्लोगोदय नया एग्रीगेटर

पितृ तुष्टिकरण परियोजना

Shah Nawaz said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति है दीप्ति जी..

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति के साथ.... मनभावन पोस्ट...

Neeraj Dwivedi said...

बजह से उसकी ही मैं उदास हूँ.
Sundar...but sad

उबरने की कोशिश जारी रखिये

रेखा said...

ये हताशा जल्द ही ख़त्म हो .....

shikha varshney said...

गज़ब की लय है.पर इतनी निराशा ठीक नहीं.

kshama said...

Nihayat sundar rachana!

सुबीर रावत said...

निर्मल मन की सहज अभिव्यक्ति. अति सुन्दर. ...जीने के लिए उत्साह चाहिए. नैराश्य ठीक नहीं है.

परमजीत सिँह बाली said...

बढिया रचना!!

yashoda4 said...

रंजों की जिन्दगी और हताशा के साथ उदासी भी
बहुत खूब दीप्ति जी ...........साधुवाद

prerna argal said...

आप की पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (१०) के मंच पर शामिल की गई है /आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप हमेशा ही इतनी मेहनत और लगन से अच्छा अच्छा लिखते रहें /और हिंदी की सेवा करते रहें यही कामना है /आपका ब्लोगर्स मीट वीकली (१०)के मंच पर आपका स्वागत है /जरुर पधारें /

Vivek Jain said...

सुन्दर प्रस्तुति, बधाई,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Vivek Jain said...

सुन्दर प्रस्तुति, बधाई,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...




दीप्ति जी ,
रचना अच्छी है …
लेकिन निराशा हताशा को मन से निकाल बाहर कीजिए … कभी हो तो …

रचनाशीलता बहुत बड़ा सहारा है न ! :)



आपको सपरिवार
नवरात्रि पर्व की बधाई और
शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

-राजेन्द्र स्वर्णकार

Anonymous said...

Hello! I just wanted to take the time to make a comment and say I have really enjoyed reading your blog.

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