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मुझे जाना होगा



मुझे जाना होगा |
कुछ दिन आप सब से दूर ,
पेपर हैं पड़ना है ,
कुछ याद है कुछ करना है,
याद करने मुझे जाना है
मुझे जाना होगा |


डेढ़ महीने ही बात है
अब तो ये मेरे हालात हैं
कर नही सकती हूँ कुछ
सोचती हूँ फिर आऊँगी
लेकर भावनाएं 
कुछ अपनी कुछ परायी 
तो फिर मुझे जाना है 
मुझे जाना होगा |


दे दीजिये आशीष 
और कामना कीजिये 
सफल हो लौटू 
अपनी इस जंग से
इस जंग की खातिर 
अब मुझे जाना है 
मुझे जाना होगा |



मैं पढ़  रही थी तभी मुझे याद आया की अब मैं  बहुत दिनों तक आप सब के साथ नही रह पाऊँगी मेरे पेपर हैं तो बेठे हुए यूँही  सोचते हुए कुछ पंक्तिया याद आई तो सोचा इसी तरह आप सबसे विदा लूँ  कुछ दिनों के लिए |
जब तक पेपर ख़तम ना हो
बस आपका आशीष मिल जाये 
तो जल्द ही मिलना भी होगा |
पर आप सब से अनुरोध है 
की कभी भूल ना जाना
आऊँगी मैं  लौटकर 
मुझे याद रखना |

- दीप्ति शर्मा 

Comments

अच्छी लगी यह रचना दीप्ति..... भावपूर्ण ...
परीक्षाओं के लिए शुभकामनाये......
बढ़िया रचनात्मक प्रस्तुति...परीक्षा के लिए शुभकामनाएँ...
दीप्ति जी,

:-) ...वाह क्या बात है....बढ़िया है.....खुदा आपको सफलता के ऊँचे मुकाम तक पहुंचाए.....आमीन...हम आपके लौटने का इंतज़ार करेंगे|

अब कमेन्ट कर दिया .....अब मुझे जाना होगा
bahut saara aashirwaad , jo rah gaya hai yaad karne ko, wo ho jaye yaad - zindagi me safalta ke liye kai baar door hona padta hai
amar jeet said…
हमारी शुभकामनाये आपके साथ है, अच्छे से पढ़िए और अच्छे से पेपर बनाइये !यदि परीक्षाओ के दौरान कुछ समय मिले तो कौन से पेपर कैसा बना, कौन से प्रश्न में कठिनाई आई इस विषय पर लिखियेगा1 जिससे आपको भी पढाई के बिच में थोडा सा परिवर्तन मिलेगा !
बहुत सारी शुभकामनायें और आशीर्वाद ...
vikas chaudhary said…
best of luck for ur exams


vikas
बिलकुल जाइये और परीक्षा में अच्छी तरह से उत्तीर्ण होइए ... ब्लॉग कहीं नहीं जा रहा है ... बाद में भी हो सकता है ... अभी ज्यादा ज़रूरी है पढाई ...
परीक्षा के लिए शुभकामनायें !
बहुत सुन्दर प्रस्तुति..परीक्षाओं के लिए हार्दिक शुभ कामनायें !
Shah Nawaz said…
परीक्षा के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं!


प्रेमरस.कॉम
जाओ जी, अच्छे से तैयारी करके परीक्षा दो और सफ़ल होकर लौटो।
शुभकामनायें।
UNBEATABLE said…
bahut Sundar .. kavyatmak abhivyakti .. Bahut saari Shubhkaamnaye ... Vijayibhavah
अपनी भावनाओं को आपने खूबसूरती से पेश किया है ...क्या अंदाज है ....परीक्षाओं के लिए शुभकामनायें ...आप सफल हों ...शुक्रिया
Kunwar Kusumesh said…
दीप्ति जी,
तुम्हारा काम पढ़ना है , मेरी ड्यूटी दुआ देना.
मगर जब पास होना तब मिठाई भी खिला देना.

आप मेरे ब्लॉग पर आईं ,बहुत बहुत धन्यवाद.
पता नहीं इस समय आपके इम्तहान हो गए या नहीं,अगर नहीं तो पढ़ने में ध्यान इस समय ज़ियादा लगाइयेगा.
आपका B.Tech का कौन सा year है ?
आपका मेल id होता तो ढेर सारी दुआएं मेल से देता. मेरी id मेरे ब्लॉग पर ही मिल जाएगी.

और हाँ,आपने अपनी भावनाएं कविता में बहुत अच्छी तरह से व्यक्त की हैं.
आपके अच्छे नंबरों से पास होने की और जीवन में तरक्की के लिए मेरी दिली दुआएं आपके साथ हैं.
बहुत ही सुन्दर कविता। परीक्षाओं में अच्छा करें।
shikha varshney said…
तुम्हें ढेरों शुभकामनायें अच्छे से परीक्षा दो हम सब यहाँ इंतज़ार करेंगे.
aapke bpog name "sparsh" pe maine kuchh likha hai....samay mile to dekhna

wish u happy new year also!
हार्दिक शुभकामनाएं तथा शुभ आशीष
PK Sharma said…
कितना अच्छा लिखती हैं आप , सच में आँखें भर आती हैं....
हमारे ब्लॉग पर भी आये आपका वेलकम है

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !