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रास्ते पर थके पाँव
चली जा रही हूँ
उस ऊँचे टीले को देखती
जहाँ धीरे से उतरती
गर्भवती महिला पति को थामे
फिर तभी तेज रफ्तार
भागती गाड़ियाँ
और वहीं सामने स्कूल
जिसका छूट्टी का घण्टा बज रहा है
स्कूल से बच्चों का तेजी से निकल
सड़क पार करना
थककर बगल के चबूतरे पर बैठी
सोच रही हूँ
सब व्यस्त हैं
सबकी अपनी दिनचर्या
और मेरी दिनचर्या
सबको यूँ ही देखते रहना
नहीं!
या चलते जाना
शायद ये भी नहीं!
जीवन में अनुभव बटोरना
हाँ यह संभव है
और बुजुर्ग होने पर कहना
अनुभव है मुझमें भी बरसों का
यूँ ही बाल सफेद नहीं हुए
सामने से प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करना
और कहना मेरी बात सुनो
ना सुने जाने पर
फिर खो जाना उन्हीं दौड़ती सड़कों पर
या फिर चल पड़ना थके पाँव
जीवन को समझने
या खुद को समझाने।

Comments

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, धन्यबाद।
बहुत ही शानदार रचना की प्रस्‍तुति।

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा