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ब्लॉग की दूसरी वर्षगाँठ 28/7/20012



नमस्कार ,
                 मुझे ये बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि आप सभी मित्रों , गुरुजनों के आशीष एवं सहयोग से और आप सभी की छत्रछाया में मेरे ब्लॉग ने अपने 2 वर्ष पुरे कर लिए हैं ।
बस यूँ ही अपना मार्गदर्शन एवं सहयोग देते रहियेगा ,,, आभारी हूँ ,,,, शुक्रिया ।

Comments

बधाई हो...
शुभकामनाएं......
निरंतर प्रगति करती रहें.....
बहुत बहुत बधाई दीप्ति जी ।

सादर
आपको ढेरों बधाई..
Reena Maurya said…
आपको बहुत - बहुत बधाई..
और शुभकामनाये ....
:-)
आपको बहुत - बहुत बधाई..
Kailash Sharma said…
बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें...
kshama said…
Bahut,bahut mabarak ho!
expression said…
बहुत बहुत बधाई...............

रचनात्मकता बनी रहे....लेखनी अनवरत चलती रहे...
शुभकामनाएं दीप्ति जी.

अनु
हैप्पी बर्थ डे टू योर ब्लॉग ...ढेर सारी शुभकामनयें
ब्लॉग की दूसरी वर्षगाठं होने पर आपको ढेर सारी बधाई हो...
मेरी नयी पोस्ट:- जानिए पिक्सल क्या होता है?
बधाई और शुभकामनाएँ ....निरंतर आगे बढ़े

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा

शोषित कोख

उस बारिश का रंग दिखा नहीं
पर धरती भींग गयी
बहुत रोई !
डूब गयी फसलें
नयी कली ,
टहनी टूट लटक गयीं
आकाश में बादल नहीं
फिर भी बरसात हुई
रंग दिखा नहीं कोई
पर धरती
कुछ सफेद ,कुछ लाल हुई
लाल ज्यादा दिखायी दी
खून सी लाल
मेरा खून धरती से मिल गया है
और सफेद रंग
गर्भ में ठहर गया है,
शोषण के गर्भ में
उभार आते
मैं धँसती जा रही हूँ
भींगी जमीन में,
और याद आ रही है
माँ की बातें
हर रिश्ता विश्वास का नहीं
जड़ काट देता है
अब सूख गयी है जड़
लाल हुयी धरती के साथ
लाल हुयी हूँ मैं भी।
-- दीप्ति शर्मा
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा