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कलम


ये  मेरे साथ रहती है
और सारे दर्द सहती है
पर जिन्दगी से इसे
बहुत हैरानी है
ना ही हँसती ना ही रोती
ये लिखती मेरी कहानी है|
  वो अल्फ़ाज मेरे
  दिल की धडकन के
  सब इसकी जुबानी है
  ये लिखती मेरी कहानी है |
निगरा समझ वो मेरा
सारा जहाँ  बताती है
समझ मुझे लिखा उसने
ये उसकी मेहरबानी है
ये लिखती मेरी कहानी है|
  रुके हुए कुछ झुके हुए
  मेरे अश्कों में उसकी
  हर वक्त निगरानी है
  जब इसकी जुबानी है
  ये लिखती मेरी कहानी है |

-दीप्ति शर्मा


Comments

Anonymous said…
kya kalam hai tmhari
waah
Kunwar Kusumesh said…
Pen is the most powerful weapon provided it is rightly used.
आपकी क़लम क़ाबिले-दाद है.बहुत अच्छी चल रही है.
Paresh Shah said…
Bahot Acchhi hai..... Really Heart Touching.....
Shekhar Kumawat said…
ye kalam hi hai jo dil ke arman ko bahar nikalti hai
कलम का कवि से सदैव का सम्बन्ध है।
सटीक बात कही है ....
ashish said…
बयाने -ए कलम अच्छा रहा . ऐसे ही चलती रहे आपकी कलम .
MAYA said…
कलम तो वही लिखेगी दीप्ति जी जो आपके मन में होगा, कलम में बहुत ताकत होती है ये हमारे मन के विचारो को लोगो तक पहुचाती है आपने अपनी इस कविता में कलम और अपनी मन की सोच को बहुत ही अच्छी तरीके से कविता का रूप दे दिया है, इसके लिए आप को मेरी बधाई
कलम के महत्त्व को बखूबी उभारा है आपने.
अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया.

सादर
kshama said…
Kya gazab dhatee hai qalam aapkee!
Deepak Saini said…
सुन्दर कविता
Amit Tiwari said…
सुन्दर कविता...
भावपूर्ण अभिव्यक्ति,...
कलम का कवि से सदैव का सम्बन्ध है।
कलम के महत्त्व को बखूबी उभारा है आपने.
Shah Nawaz said…
आपने इस रचना के माध्यम से अपने दिल की दास्ताँ को लिखने की बेहतरीन कोशिश की है दीप्ति जी... बहुत खूब!
क़लम के ऊपर बेहतरीन कविता। क़लम में जो ताक़त है वह तलवार में कहां!
बहुत सशक्त भावपूर्ण कविता...कलम ही ज़िंदगी का सहारा और आवाज होती है..बहुत सुन्दर
PK Sharma said…
दीप्ति जी मार ही डालोगी
अपने कलम की ताकत से
कसम से बहुत अच्छी लगी
बहुत खूब......कुछ अलग.......प्रशंसनीय|
सटीक बात कही है
इस कविता का तो जवाब नहीं !
UNBEATABLE said…
कविता में कलम का कमाल ...... वाह बहुत खूब ....... सुन्दर चित्रण किया है तुमने ..... इसी तरह कलम चलाती रहो
prerna argal said…
aap to bahut achcha likhtin hai .main to phali baar aapke blog main aai aur aapki fan ban gai.kalam ke baare main bahut achchi rachana.bahut bahut badhai aapko.
aasha hai aage bhi aap mera blog main aati rahengi aur mera apne sandeson dwaraa margdarsan karati rhengi.thanks
OM KASHYAP said…
एहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब
बहुत सशक्त भावपूर्ण कविता|
कवि और लेखकों का तो सबसे प्रिय साथी कलम ही है...कलम पर सुंदर भाव अभिव्यक्ति..एक सार्थक रचना के लिए धन्यवाद..बधाई
कलम पर लिखी एक उम्दा कविता आपको बधाई और शुभकामनाएं |आपका दिन शुभ हो |
"जब मैं चुप होता हूँ तो मेरी जुबां बन जाती है
जो जुबां ना कह सके वो कलम कह जाती है"
-आमीन

दुनाली पर आएं-
कहानी हॉरर न्यूज़ चैनल्स की
Rachana said…
kalam ki kya baat hai sachchha sathi hai
sunder abhiyakti
rachana
Arunesh c dave said…
कलम हाथ मे न हो तो भावनाएं मन मे ही खत्म हो जाती हैं
Ravi Rajbhar said…
Solah ane sach...
o kalam hi to hai jo sab kux kahti hai.
बहुत बढ़िया और सही लिखा है आपने।
सौभाग्य से मैने अपनी जिन्दगी की पहली कविता कलम पर ही लिखी थी ।
जरुर देखें और अपनी राय दें ।
www.pradip13m.blogspot.com
http://pradip13mkalam.com/

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जन्मदिन

आज मेरी प्यारी बहिन का जन्मदिन है और मैं बहुत खुश हूँ ,, मेरी तरह से उसे ढेरो शुभकामनाये ,,, कृपया आप भी अपना बहुमूल्य आशीर्वाद उसे प्रदान करें |

आज जन्मदिवस पर तेरे ,
ओ मेरी प्यारी बहिन
दुलार करते हैं सभी
प्यार करते हैं सभी

हजार ख्वाहिशें जुडी हैं
माँ पापा की तुझसे
रौशन है ये आँगन तुझसे
कह दे तू ये आज मुझसे
न दूर हो हम कभी भी
अब एक दूजे से

जफ़र पा ओ मेरी बहिन
घर जल्दी आना तू अबकी
आँखों का तारा हैं तू सबकी

तेरा सपना सच हो जाये
हर ख्वाहिश पूरी हो जाये
जन्मदिन पर मिले तुझे
सबका इतना आशीष
की हर बाला आने से
पहले ही टल जाये

जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो प्रीती .

- दीप्ति शर्मा
मन से निकली,
मन तक पहुँची,
वो अनकही बात,
पर कैसे?
आँखों से पगली,
अब समझी ना !
अभी कुछ देरपहले
मुझे आवाज़ आयी
माँ , मैं यहाँ खुश हूँ
सब  बैखोफ घूमते हैं
कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता
धर्म के लिये नहीं लड़ता
देश के लिये,
उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता
देखो माँ
हम हाथ पकड़े यहाँ
साथ में खड़े हैं
सबको देख रहे हैं
माँ, बाबा से भी कहना
कि रोये नहीं
हम आयेगें फिर आयेगें
पर पहले हम जीना सीख लें
फिर सीखायेगें उनको भी
जिन्हें जीना नहीं आता
मारना आता है
माँ, आँसू पोंछकर देखो मुझे
मैं दिख रहा हूँ ना! 
हम सभी आयेगें पर तभी
जब वो दुनिया अपनी सी होगी
नहीं तो हम बच्चे
उस धरती पर कभी जन्म नहीं लेगें
तब दुनिया नष्ट हो जायेगी
है ना! 
पर उससे पहले
माँ, बाबा आप
यहाँ आ जाना हमारे पास
हम यहीं रहेगें
फिर कोई हमें अलग नहीं करेगा
तब तक के लिये तुम मत रोना
हम सब देख रहे हैं
और मैं रोते हुए चुप हूँ
बस एक टक देख रही हूँ
तुझे बेटा
तेरे होने के अहसास के साथ
©दीप्ति शर्मा