बुझा हुआ सा चेहरा मुरझाये से हालात कहा करते हैं अक्सर कि इंतज़ार रहेगा तुम्हारा चाँद के ढलने से चाँद के उगने तक.. महसूस करती हूँ कभी वो आहटें और कभी कोई आवाज़ जो मेरा नाम ले प...
लहरों से बहने के साथ में हर लफ़्ज़ से निकली बात में अँधियारी सी उस रात में कोई तो बात होती है । ख़ामोशी से कह जाने में कुछ छुपने और छुपाने में धड़कनों को बहलाने में कोई तो बात ...
जब पहला आखर सीखा मैंने लिखा बड़ी ही उत्सुकता से हाथ पकड़ लिखना सिखलाया ओ मेरी माँ वो तू ही है । अँगुली पकड़ चलना सिखलाया चाल चलन का भेद बताया संस्कारों का दीप जलाया ओ मेरी म...
मैं कोई किस्सा सुनाऊँगी कभी आँखो से आँसू बहाऊँगी कभी तुम सुन सको तो सुन लेना स्याह रात की बिसरी बातें मैं तुम्हें बताऊँगी कभी मैं फासलों को मिटाऊँगी कभी मैं कोई किस्सा सु...