मेरी कहानी

वो किस्सा था या कहानी थी
बात थी दिल की जो कि,
बस दो लफ्जो में बतानी थी |
कही जो बात दिल से थी वो
कुछ बाते बड़ी रूमानी थी\
वो अंदाजे वफ़ा जो कभी,
शिखर तक उसकी जुबानी थी|
हाल-ये-दिल उल्फत में,
बयां कर गया कुछ बातें
वो कुछ लम्हों कि निशानी थी|
जब राहें बनाये थी मैंने |
सहारा ले कुछ पत्थरों का
वो राहें भी तो अनजानी थी|
मुकद्दर था ही नही रौशन ,
तभी तो वो दिल कि बातें
मेरी तबाही कि निशानी थी
अंगारे बन गये वो बाते
बातों भरी वो मेरी कहानी थी |
२००९
   दीप्ति शर्मा

Comments

mr. Ajit said…
hey deeepti nice job .............

ati sundar kavita ....
SANSKRITJAGAT said…
वाह हर शब्‍द में बडी गहराई है ।

बहुत अच्‍छा लिखती हैं आप

बस यूँ ही हिन्‍दी साहित्‍य की सेवा करते रहिये ।


शुभकामनाएँ ।
MGhosh said…
hhhhhiiiii
ths is very nice.........
actually savi itne aache hai ki mein kya tarrif karoooo thoda muskil hai yar..........

u r fabulous.......
खूबसूरती से अपनी कहानी कहने की कोशिश की है ...

बाकी बाद में पढूंगी ..
UNBEATABLE said…
Deepti ...... Bahut bhavpurn Likha hai ... Bhav Prabal aur pravahmayii ....... Bahut Sundar :)
Amit Chandra said…
दीप्ती जी........... हमारे ब्लाग पर आने के लिए शुक्रिया ! आपने हमारी कोशिश को जो इज्जत बख्शी है मैं उसका तहे दिल से शुक्रगुजार हंु, और आशा करता हुं कि आप इसी तरह से मेरा उत्साहवर्धन करती रहेगी। आपकी सारी कविताएं एक से बढ़कर एक है।
deepti sharma said…
dhanybad anand ji n sangeeta ji n unbeatable li n ehsas ji aap sab ne mujhe protsahan diya
S!-!uB!-!@M said…
hi deepti very very nice that ...i can't explain..........bahut aacha likhi hooo.!!!!!!!!
ARUN said…
Nice thought....
i pray God,to achive whole prosperity of your life which u want,....>>>
Unknown said…
Bahut sundar likha hai aapne...

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