तूने,

कैसी घडी ला खड़ी की तूने,
न कोई तमन्ना न कोई आरजू,
सितम भी खूब आया ,
रस्मो रिवाजो को तोड़ डाला,
दुनिया से  बेखबर ऐ हंसी ,
कैसी घडी ला खड़ी की तूने |
दुनिया से रुक्तबू होने से पहले
सरमिन्दगी महसूस होने से पहले ,
अँधेरे राश्ते मैं यूँ मुझे
तन्हा छोड़कर चली गयी
दुनिया से  बेखबर ऐ हंसी ,
कैसी घडी ला खड़ी की तूने |

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