यादों की नदी,बातों का झरना
सदियों से साथ बहते,झरते
पर अब झरना सूख गया,
नदी का वेग तीव्र हो गया,
जिसमें कश्तियाँ भी डूब जाती हैं।
(बस यूँ ही ,जिंदगी सच)
# हिन्दी_ब्लॉगिंग

Comments

अन्तर्राष्ट्रीय ब्लोगर्स डे की शुभकामनायें .... #हिन्दी_ब्लॉगिंग
Shekhar Suman said…
ज़िन्दगी की कश्ती कभी नहीं डूबती...
Himanshu Pandey said…
गज़ब! झरना सूखा पर नदी वेगवती हो गयी। जिह्वा मूक पर मन में स्मरण का आवेग!
Jyoti khare said…
वाह !!!! बहुत सुंदर
शुभकामनाएं

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