मुस्कुराहट


मैं भागता रहा
मैं चीखता रहा
सड़कों पर ।
साथ छूटता रहा
मैं ढूंढ्ता रहा
मोड़ो पर ।
दम घुटता रहा
मैं चलता रहा
शहर के हर
कोनों पर।
वो नहीं मिली
शून्य में लुप्त हुई
एक मासूम मुस्कुराहट ।

  --   दीप्ति शर्मा

Comments

Unknown said…
Bahut khoob
Bahut umda
aik muskurahat ki talash ki chatpatahat behtareen andaaz aur alfaaz me....
आपकी रचना अपने आपमें साहित्य का जीवंत दस्तावेज है बधाई |
कवि अनिल उपहार
Unknown said…
मैं आपका ब्लॉग पढ़ कर बहुत खुश हूँ।।

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