Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - June 14, 2012 इंतिहाऐं इश्क की कम नहीं होती वो अक्सर टूट जाया करती हैं मुकम्मल सी वो कुछ यादें बातों के साथ छूट जाया करती हैं पहलू बदल जाते हैं जिंदगी के उन तमाम किस्सों को जोड़ते जुड़ती है तब जब ये साँसे डूब जाया करती हैं ©दीप्ति शर्मा Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments अरुन अनन्त said… सुन्दर पन्तियाँ(अरुन = arunsblog.in) Yashwant R. B. Mathur said… बहुत खूब दीप्ति जी सादर M VERMA said… बहुत खूब प्रवीण पाण्डेय said… बड़ी सजीव पंक्तियाँ.. yashoda Agrawal said… जीवन्त रचनाशुक्रिया दीप्ति बहन Anju (Anu) Chaudhary said… वाह बहुत खूब मेरा मन पंछी सा said… बहुत ही सुन्दर रचना..... Kailash Sharma said… बहुत सुन्दर.... आचार्य ललित मुनि said… बेहतरीन रचना,शुभकामनाएं मिलिए सुतनुका देवदासी और देवदीन रुपदक्ष से रामगढ में जहाँ रचा कालिदास ने महाकाव्य मेघदूत।
Comments
(अरुन = arunsblog.in)
सादर
शुक्रिया दीप्ति बहन
मिलिए सुतनुका देवदासी और देवदीन रुपदक्ष से रामगढ में
जहाँ रचा कालिदास ने महाकाव्य मेघदूत।