ये वो माँ है जिसके सारे बच्चे अच्छे पद व रुतबे, कोठी व कार वाले हैं ये वो माँ है जिसने दो रुपये की खादी की साड़ी पहन बच्चों को अच्छे कपड़े पहनाये ये वो माँ है जो खुद भूखी रही पर बच...
रास्ते पर थके पाँव चली जा रही हूँ उस ऊँचे टीले को देखती जहाँ धीरे से उतरती गर्भवती महिला पति को थामे फिर तभी तेज रफ्तार भागती गाड़ियाँ और वहीं सामने स्कूल जिसका छूट्टी का घण्टा बज रहा है स्कूल से बच्चों का तेजी से निकल सड़क पार करना थककर बगल के चबूतरे पर बैठी सोच रही हूँ सब व्यस्त हैं सबकी अपनी दिनचर्या और मेरी दिनचर्या सबको यूँ ही देखते रहना नहीं! या चलते जाना शायद ये भी नहीं! जीवन में अनुभव बटोरना हाँ यह संभव है और बुजुर्ग होने पर कहना अनुभव है मुझमें भी बरसों का यूँ ही बाल सफेद नहीं हुए सामने से प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करना और कहना मेरी बात सुनो ना सुने जाने पर फिर खो जाना उन्हीं दौड़ती सड़कों पर या फिर चल पड़ना थके पाँव जीवन को समझने या खुद को समझाने।
अभी कुछ देरपहले मुझे आवाज़ आयी माँ , मैं यहाँ खुश हूँ सब बैखोफ घूमते हैं कोई रोटी के लिये नहीं लड़ता धर्म के लिये नहीं लड़ता देश के लिये, उसकी सीमाओं के लिये नहीं लड़ता देखो ...
बंद मुट्ठी के बीचों - बीच एकत्र किये स्मृतियों के चिन्ह कितने सुन्दर जान पड़ रहे हैं रात के चादर की स्याह रंग में डूबा हर एक अक्षर उन स्मृतियों का निकल रहा है मुट्ठी की ढीली ...
राजपथ पर चलती मैं अकेली धूप से बचती छतरी ओढे चली जा रही हूँ धूप की तेज़ किरणें छतरी को पार कर मुझे जला रही हैं और मैं सुकडती चली जा रही हूँ , वहीं पास से लोगों का हूजूम निकल रहा ह...
बादलों का अट्टहास वहाँ दूर आसमान में और मूसलाधार बारिश उस पर तुम्हारा मुझसे मिलना मन को पुलकित कर रहा है मैं तुम्हारी दी लाल बनारसी साड़ी में प्रेम पहन रही हूँ कोमल, मखमली...