दो अंगुलियों के बीच
वो अनुभूति नहीं पनपती
जो तुम्हारे और मेरे बीच
अक्सर पनपा करती है ।
© दीप्ति शर्मा

Comments

Jyoti khare said…

सुंदर अनुभूति
बधाई

आग्रह है- पापा ---------
.बहुत ही खुबसूरत रचना...
Unknown said…
बहुत ही अच्छी भावनाओँ की अभिव्यक्ति । इतनी सुन्दर रचना के लिए बधाई । सस्नेह

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