कब Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - October 24, 2011 कैद हैं कुछ यादों के भंवर जो सुलगते हैं पर पिघलेगे कब ? - दीप्ति शर्मा Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments Anonymous said… honge jarur honge!!! प्रवीण पाण्डेय said… समय आने पर वह ज्वार पिघलेगा। संगीता पुरी said… वाह ..आपको दीपावली की शुभकामनाएं !! आहुति said… bhaut khub... Patali-The-Village said… बहुत सुन्दर प्रस्तुति |दीवाली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ| Atul Shrivastava said… उम्मीद पर दुनिया कायम है...सुंदर प्रस्तुति। आपको और आपके परिवार को दीप पर्व की शुभकामनाएं...... Yashwant R. B. Mathur said… वाह!आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ!सादर ललित शर्मा said… दीवाली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ| Amrita Tanmay said… .**शुभ दीपावली ** दिगम्बर नासवा said… हर चीज़ अपने समय पर होती है ..दीपावली की मंगल कामनाएं .. Anonymous said… सर्दी के इस ख़ुश्क मौसम में सुलगती हुई एक लघु आकार की साकार कोशिश....शुभकामनायें...... Yashwant Singh Shekhawat said… तुम्हारा यह प्रिय स्पर्श जो छूने के बाद छुटता नहीं__इन भावनाओं के भंवर को रुकने मत दो__सुलगने दो__स्नेही तुम समझो__इससे सुलगने से ही तुम्हारी संचेतना और बढती जायेगी और अंधों को प्रकाश |
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आपको दीपावली की शुभकामनाएं !!
दीवाली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|
सुंदर प्रस्तुति।
आपको और आपके परिवार को दीप पर्व की शुभकामनाएं......
आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ!
सादर
दीपावली की मंगल कामनाएं ..