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ओ मीत

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मेरे गीत तेरी पायलिया है ओ मीत तू मेरी सावरिया है| प्रेम गीत मैं गा रहा हूँ तेरे लिए ही आ रहा हूँ मिलन को बरस रही बादरिया है ओ मीत तू मेरी सावरिया है| मद्धम हवा साथ चली है दिल में दीपक सी उजली है देख   छलक   गयी गागरिया है ओ मीत तू मेरी सावरिया है| अगली पहर तक आ जाऊंगा तुझे दुल्हन बना मैं ले जाऊंगा नजरें उठा जरा तू दुल्हनिया है ओ मीत तू मेरी सावरिया है| © दीप्ति शर्मा  
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लहरों को देखकर डर जाते हो तुम आँखें बंद कर सिहर जाते हो तुम जानते हो डूब जाओगे समन्दर में तो जानकर भी पास क्यों जाते हो तुम । © दीप्ति शर्मा  

सुनसान रस्ते

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डर सा लगता है अकेले चलने में अँधियारे और तन्हा से उन सुनसान रस्तों पर । जहाँ कोई नहीं गुजरता बस एक एहसास है मेरा जो विचरता है ठहरता है और फिर चल पड़ता है उन सुनसान रस्तों पर । ...
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नववर्ष में आओ हाथ मिलाये साथ मिलकर चल पड़े नव उमंग की चाह में हम बढ़ चले हम चल पड़े । सूरज की रौशनी सा प्रेम भाव ले चले कदम से कदम मिला हम बढ़ चले हम चल पड़े । आपस का बैर भूलकर नय...

शब्द

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वो शब्द छोड़ दिये हैं असहाय विचरने को खुले आसमान में वो असहाय हैं, निरुत्तर हैं कुछ कह नहीं पा रहे या कभी सुने नहीं जाते रौंध दिये जाते हैं सरेआम इन खुली सड़को पर संसद भवन के बाहर और न्यायालय में भी सब बहरे हैं शायद या अब मेरे शब्दों में दम नहीं जो निढाल हो जाते हैं और अक्सर बैखोफ हो घुमते कुछ शब्द जो भारी पड़ जाते हैं मेरे शब्दों से... आवाज़ तक दबा देते हैं तो क्यों ना छोड़ दूँ अपने इन शब्दों को खुलेआम इन सड़कों पर विचरने दूँ अंजान लोगों में शायद यूँ ही आ जाये सलीका इन्हें जीने का । © दीप्ति

मैं कद्र करती हूँ

एक ऐसा इंसान जो सच के लिये जीता हो... त्याग, सदभावना में विश्वास हो.. मैं भी एक ऐसे इंसान को जानती हूँ सच में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं.. कुछ पंक्तियाँ मेरी तरफ से.. वो आत्मविश्वास जि...
कब तक आबरू अपनी खोयेगी हैवानियत पर फूट फूटकर रोयेगी शरम करो नौजवानों, रहते तुम्हारे कब तक वो नारी काल के गाल में सोयेगी?? © दीप्ति शर्मा